धानेपुर(गोंडा)। खरीफ की बोआई छोड़ किसानों को खेत छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। बुधवार को गोंडा-उतरौला मार्ग पर धानेपुर के पास किसानों ने प्रदर्शन कर जाम लगाया। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस व किसानों के बीच भी नोकझोंक हुई।
साधन सहकारी धानेपुर पर सुबह आठ बजे से ही किसानों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। 10 बजे तक आठ सौ से अधिक किसान लाइन में लग गए। भारी भीड़ देखने के बाद समिति के सचिव के पसीने छूटने लगे। वह खाद वितरण के लिए पुलिस के सहयोग के लिए थाने पर चले गए।
ऐसे में लाइन में लगे किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। समिति से निकलकर किसान सड़क पर जमा हो गए। सड़क जाम होने से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई। किसान जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन व स्थानीय विधायक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना दर्द व्यक्त कर रहे थे। सूचना मिलने पर प्रभारी निरीक्षक निर्भय नारायण सिंह अपनी टीम के साथ पहुंचे। पुलिस व किसानों में तीखी नोकझोंक हुई। करीब 15 से 20 मिनट तक चले हंगामे के बाद किसानों को दोबारा समिति पर बुलाकर कतारबद्ध कराया। इसके बाद किसानों का पीओएस मशीन पर सत्यापन करवाकर खाद वितरण शुरू किया गया।
किसानों ने सुनाया अपना दर्द
उज्जैनी कला निवासी किसान रोहित तिवारी ने बताया कि सुबह नौ बजे से लाइन में खड़े हुए हैं। एक बजे तक खाद नहीं मिल सकी है। इसके पहले कई बार समिति से वापस जाना पड़ा है। शिवपुर पावर हाउस के पास रहने वाले बृजानंद तिवारी ने बताया कि सुबह आठ बजे से ही कागज लिए लाइन में खड़े हैं। इधर से उधर टरकाया जा रहा है, एक बजे तक तक खाद वितरण नहीं शुरू किया गया। सचिव मनमानी कर रहे हैं।
किसानों की संख्या अधिक होने से मांगा पुलिस का सहयोग
समिति के सचिव राधेश्याम प्रजापति ने बताया कि 700 बोरी खाद आई है लेकिन किसान हजारों की संख्या में इकट्ठा हो गए। इसलिए बिना पुलिस के सहयोग के खाद वितरण संभव नहीं था। पुलिस से सहयोग लेने थाने पर गया था, तभी किसानों ने सड़क जाम कर दिया। किसानों की संख्या को देखते हुए बॉयोमीट्रिक सत्यापन के लिए दो मशीनें लगाई गईं हैं। सर्वर की समस्या के कारण भी परेशानी हुई है।
समिति पर भेजी जा रही प्राइवेट खाद
सरकारी कोटे के अलावा प्राइवेट दुकानों को भेजी जाने वाली खाद का 50 फीसदी हिस्सा साधन सहकारी समितियों पर भेजा जा रहा है। लगभग सभी समिति पर खाद उपलब्ध हो गई है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी