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20 हजार हेक्टयर जमीन पर सिंचाई का संकट, एक लाख किसान प्रभावित

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बालपुर (गोंडा)। धनई पट्टी माइनर खोदाई मात्र 1.5 किलोमीटर को लेकर फंसी है। किसानों से विवाद होने के कारण 20 हजार हेक्टेयर खेत की सिंचाई पर संकट के बदल छाए हैं। 16.5 किलोमीटर नहर की खोदाई का काम पूरा हो चुका है। इस नहर से निकलने वाले नौ माइनर भी 56 किलोमीटर में बनकर तैयार हैं। नहर की खोदाई में केवल 570 मीटर परसा गोंडरी में और 1200 मीटर धानी, धनखर व ठकुरापुर में किसान खोदाई का विरोध कर रहे हैं। जबकि 2011 में इन किसानों की जमीन का अधिग्रहण करके जिलाधिकारी ने 73 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये पुनर्वास देने का नोटिस जारी किया। किसानों ने बिना बताए जमीन अधिग्रहण के विरोध में नोटिस लेने से इंकार कर दिया। 2011 से किसानों का 83 हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से जिलाधिकारी के खाते में एफडी के रूप में जमा है। 18 किलोमीटर तक जाने वाली इस नहर से नौ माइनर 56 किलोमीटर निकलती है, जो बनकर तैयार है। बेलवा नोहर माइनर 10 किलोमीटर, दुर्गोड़वा माइनर 3.5 किलोमीटर, करनपुर माइनर तीन किलोमीटर, खरगूपुर माइनर पांच किलोमीटर, गोड़वा माइनर तीन किलोमीटर, भटपुरवा माइनर आठ किलोमीटर, डिडसिया कला माइनर छह, लौवाटेपरा माइनर 3.5 किलोमीटर की खोदाई पूरी हो चुकी है।
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बस किसानों को पानी आने का इंतजार है। इस नहर के शुरू हो जाने से करीब एक लाख किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी, लेकिन आठ साल से धनई पट्टी नहर खोदाई का विरोध चल रहा। जिसका सरकार कोई हल नहीं निकाल सकी। जिन किसानों ने अपनी जमीन पर खोदाई करवा दिया है वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। धनई पट्टी माइनर परसा गोंडरी से निकलकर बास गांव, सोंहरा, हड़ियागड़ा, सालपुर, धानी, धनखर, ठकुरापुर, दुर्गोड़वा, करनपुर, नरायनपुर मर्दन, तुलसीपुर, सरैया चौबे, खरगूपुर, चांदपुर, गोड़वा आदि गांव पंचायतों से होकर धनई पट्टी तक जाएगी। जबकि प्रधानमंत्री सरयू नहर परियोजना को पूर्ण मानकर बलरामपुर में परियोजना शुभारंभ कर चुके हैं, लेकिन अभी भी परियोजना गोंडा में अधूरी है। विभाग की लापरवाही से अभी नहर का संचालन शुरू नहीं हुआ है। परसा गोडरी व सालपुर धौताल में किसान 448 दिन से धरना-प्रदर्शन खेत में पंडाल लगाकर कर रहे हैं।
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नहर संचालन का हरसंभव प्रयास हो रहा है। किसानों से बातचीत की जा रही है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। हीरालाल, एसडीएम करनैलगंज
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