गोंडा। जिले में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का मामला एक बार फिर सामने आया है। पासपोर्ट आवेदन की जांच के दौरान जन्म प्रमाणपत्र जाली पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अलावल देवरिया की मूल निवासी रफीकुननिशा वर्तमान में मुंबई में रह रही हैं। उन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ गोंडा के जिला महिला अस्पताल से जारी बताया गया जन्म प्रमाणपत्र संलग्न है। मुंबई के सर जेजे मार्ग थाने की पुलिस ने प्रमाणपत्र को सत्यापन के लिए सीएमओ कार्यालय गोंडा भेजा।
जांच में सामने आया कि प्रमाणपत्र पर अंकित कोड गोंडा के किसी भी अस्पताल से संबंधित नहीं है। ये कोड कन्नौज जिले का है। सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने रफीकुननिशा के जन्म प्रमाणपत्र को फर्जी घोषित करते हुए मुंबई पुलिस को रिपोर्ट भेजी है। साथ ही प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह तक पहुंचने के लिए संबंधित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की संस्तुति की गई है।
पहले भी सामने आए हैं इस तरह के मामले
जिले में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का यह पहला मामला नहीं है। अगस्त 2025 में मसकनवा निवासी एक युवक द्वारा पासपोर्ट आवेदन में फर्जी प्रमाणपत्र लगाने का मामला भी सामने आया था। इसके अलावा अक्तूबर 2022 में गोंडा पुलिस ने फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया था। 2024-25 के बीच इस तरह के 10 मामले उजागर हुए थे। अक्तूबर 2025 में एसटीएफ ने मोतीगंज क्षेत्र से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। करीब 1.40 लाख फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाने की बात सामने आई थी।
ऐसे पहचानें असली और नकली प्रमाणपत्र
जन्म प्रमाणपत्र जारी होने के लिए माता-पिता के आधार कार्ड, अस्पताल से जारी जन्म का प्रपत्र, टीकाकरण कार्ड और जन्म से संबंधित विवरण आवश्यक होते हैं। असली प्रमाणपत्र पर जारी करने की तिथि के साथ क्यूआर कोड अंकित होता है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संबंधित बच्चे का पूरा विवरण सामने आ जाता है, जिससे प्रमाणपत्र की सत्यता आसानी से जांची जा सकती है।