पसका (गोंडा)। त्रिमुहानी घाट पर इन दिनों कल्पवास कर रहे साधु-संतों व श्रद्धालुओं के भजन कीर्तन से रौनक छाई है। ठंड भी आस्था भारी पड़ रही है। यहां 13 जनवरी को होने वाले मुख्य स्नान की तैयारी तेज हो गई है।
लखनऊ से आए मणिराम दास ने बताया कि वह त्रिमुहानी घाट पर लगभग 14 वर्ष से अनवरत कल्पवास कर रहे हैं। लघु प्रयाग के नाम से विख्यात सूकरखेत के त्रिमुहानी घाट पर स्नान-दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। तुलसीदास ने राम चरितमानस में त्रिमुहानी घाट की महिमा का वर्णन किया है। कल्पवास करने आए नयननाथ महाराज उर्फ फलाहारी बाबा ने बताया कि वह सूकरखेत में 25 वर्ष से कल्पवास करने आ रहे हैं। कचनापुर कुटीघाट के वाल्मीकि दास ने भी घाट की महिमा व सूकरखेत के इतिहास पर प्रकाश डाला।
यह है समस्या
घाट पर व्याप्त समस्याओं से कल्पवासी परेशान हैं। उनका कहना है कि सरयू नदी में सिल्ट जमा होने से स्नान घाट पर पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। पेयजल के लिए सरयू नदी के पास एकमात्र हैंडपंप है।
साफ-सफाई के दिए निर्देश
उपजिलाधिकारी करनैलगंज भारत भार्गव ने त्रिमुहानी घाट का निरीक्षण कर साफ-सफाई के साथ ही नदी में फैली जलकुंभी को साफ करने का निर्देश दिए हैं। जिला पंचायतराज अधिकारी लालजी दूबे ने शुक्रवार को त्रिमुहानी घाट का निरीक्षण कर मेले में साफ-सफाई की हकीकत परखी। डीपीआरओ ने मेला परिसर को प्लास्टिक मुक्त करने, शौचालय को यथाशीघ्र संचालित करने व मेला परिसर व घाट पर कूड़ादान रखने के साथ ही साफ-सफाई के निर्देश दिए।