गोंडा। जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाएगा और उद्योग विभाग से ऋण दिलाकर ई रिक्शे का भी इंतजाम होगा। मगर दो माह बीतने के बाद भी ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त महिलाएं नहीं मिल सकीं हैं। ऐेसे में न तो बैच बन सका और न ही ट्रेनिंग शुरू हो पाई।
बीते 25 अक्तूबर को डीएम प्रियंका निरंजन ने मिशन शक्ति 5.0 के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभागों को जिम्मेदारी दी थी। इसमें जहां कौशल विकास मिशन के तहत 25-25 महिलाओं का बैच बनाकर आईटीआई के टाटा टेक्नोलॉजी लैब में ई रिक्शे की बारीकियां बताई जाएंगी। उन्हें 240 घंटे की ट्रेनिंग देकर दक्ष बनाया जाएगा। उद्योग व परिवहन विभाग से समन्वय स्थापित करके महिलाओं का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया जाएगा। फिर ऋण दिलाकर उनके लिए ई रिक्शे की व्यवस्था भी की जाएगी। बीते सात नवंबर को कौशल विकास मिशन के अधिकारियों ने स्वत: रोजगार उपायुक्त से इच्छुक महिलाओं की सूची मांगी थी। आईटीआई के प्रधानाचार्य राम सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग के लिए महिलाएं नहीं मिल सकी हैं। ऐसे में न तो बैच बन सका और न ही ट्रेनिंग शुरू हो पाई है। ठंड के चलते प्रगति धीमी है।
जिला समन्वयक अविनाश सिंह का कहना है बैच बनाने के लिए महिलाओं से संपर्क किया जा चुका है। प्रत्येक ब्लॉक में बीपीएम को लगाया गया है। स्वत: रोजगार उपायुक्त जेएन राव का कहना है कि विभाग की ओर से इच्छुक महिलाओं के चयन की बात कही गई है। बीएमएम के माध्यम से जल्द ही इच्छुक महिलाओं का चयन किया जाएगा। सूची संबंधित विभाग को सौंप दी जाएगी।