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सहालग भी नहीं डाल सका जान, 60 फीसदी गिरा सर्राफा बाजार

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गोंडा। कोरोना संक्रमण के कारण लगाए गए लॉकडाउन ने सराफा व्यापार को चौपट कर दिया है। बाजार में ग्राहकों की आमद न के बराबर हो गई गई है। अप्रैल माह में एक-एक सप्ताह करके पूरे माह लॉकडाउन चला। इसके बाद बाजार खोलने की इजाजत मिली तो सिर्फ आवश्यक वस्तुओं के लिए। वह भी सुबह दस बजे तक ही।
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बाद में संक्रमण काल में आई कमी के कारण सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक की छूट दी गई। इससे व्यापारियों का धंधा चौपट हो गया। अब सुबह दस बजे से शाम सात बजे तक की छूट तो मिली है। मगर शाम ढलते ही बाजार में ग्राहकों का आना शुरू होता है।
समय के अभाव में ग्राहक अपनी मर्जी के मुुताबिक खरीददारी नहीं कर पा रहे हैं। सर्राफा व्यापारी दुकान बढ़ाने की जल्दी में उन्हें मनचाही ज्वेलरी भी नहीं दिखा पाते हैं। इससे धंधे में 60 फीसदी की गिरावट आई है। सहालग में सराफा व्यापारियों को बेहतर धंधा होने की उम्मीद जगी थी। मगर सहालग भी धंधे में जान नहीं डाल सका है।
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सराफा व्यापारियों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। कहने के लिए तो शहर के पुलिस गस्त और पिकेट भी लगती है। मगर कहीं सर्राफा व्यापारी लूट का शिकार बनते हैं तो कहीं उन्हें धमकी भी मिलती है। कई सर्राफा व्यापारी तो अपने प्रतिष्ठान में ही ठगी का शिकार भी बन चुके हैं।
सर्राफा एसोसिएशन (अब भंग) के पूर्व अध्यक्ष शिवकुमार सोनी ने सर्राफा व्यापारियों की सुरक्षा के लिए उन्हें आर्म्स लाइसेंस देने की मांग उठाई थी। मगर सर्राफा व्यापारियों में कइयों के लाइसेंस के आवेदन पुलिस व राजस्व कार्यालयों में जमा हैं।
मगर उनकी संस्तुति नहीं हो सकी। लिहाजा लाइसेंस के अभाव में सर्राफा व्यापारी आर्म्स नहीं खरीद पा रहे हैं। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ने सर्राफा व्यापारियों को आर्म्स लाइसेंस देने की मांग उठाई है। जिससे व्यापारी सुरक्षित रहेंगे तभी धंधे को रफ्तार दे सकेंगे।
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