हाईवे पर पोर्टरगंज में छपान के बाद भी नहीं काटे गए यूकेलिप्टस के पुराने पेड़। - संवाद
गोंडा। जिले में सड़क किनारे खड़े पुराने और जर्जर पेड़ लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। 50 वर्ष से अधिक पुराने कई पेड़ ऐसे हैं, जिनकी हालत कमजोर हो चुकी है, लेकिन उन्हें हटाने की दिशा में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि चार-पांच साल पहले कई पेड़ों का छपान (चिन्हांकन) भी किया गया था, लेकिन उनकी कटान नहीं हुई। वन विभाग और वन निगम की उदासीनता के कारण यह समस्या लगातार बनी हुई है। नवाबगंज-तरबगंज मार्ग पर पिपरी गांव के पास सोमवार को जर्जर पीपल की डाल गिरने से दो युवकों की मौत ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे खड़े पुराने पेड़ों को हटाकर पाैधरोपण कराया जाए।
पोर्टरगंज पथवलिया निवासी राजन तिवारी ने बताया कि उनके घर के सामने लगे यूकेलिप्टस के दो पुराने पेड़ खतरा बने हुए हैं। एक पेड़ हाईवे की ओर झुका है, जबकि दूसरा उनके मकान की तरफ। कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल छपान किया गया, लेकिन कटान नहीं हुआ। उनका कहना है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, क्योंकि मार्ग पर लगातार वाहनों का आवागमन रहता है। स्थानीय निवासी नागेंद्र ने भी पुराने और कमजोर पेड़ों की कटाई की मांग करते हुए कहा कि इससे दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
डीएफओ अनुराग प्रियदर्शी ने बताया कि जर्जर पेड़ों की कटान को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जा रही है।
हाईवे पर पोर्टरगंज में छपान के बाद भी नहीं काटे गए यूकेलिप्टस के पुराने पेड़। - संवाद