करनैलगंज (गोंडा)। करनैलगंज तहसील क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों में करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि के घोटाले की जांच 38 साल बाद भी पूरी नहीं हुई है। जांच के नाम पर इस मामले से जुड़ी पत्रावलियां ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। तत्कालीन मंडलायुक्त ने इस मामले की जांच एसडीएम को सौंपी थी। जिस पर जांच पूरी करने के बाद पट्टाधारकों को नोटिस जारी करके तहसील से अभिलेख तलब किए गए।
नोटिस के बाद आई जांच रिपोर्ट में फर्जी परवाने के आधार पर 12 बाहरी लोगों के नाम पट्टा दर्ज होना पाया गया। अब फर्जी पट्टाधारकों का नाम निरस्त न करके मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। करनैलगंज में तहसील की स्थापना के समय वर्ष 1985-86 में पुरानी तहसील तरबगंज से अभिलेखों के स्थानांतरण में हेराफेरी कराकर फायदा उठाते हुए भू-माफिया ने करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि का अभिलेखों में नाम दर्ज करा दिया गया था। राजस्व ग्राम लालेमऊ एवं बसेरिया में सरकारी भूमि बंजर, नवीन परती, जलमग्न, खलिहान, ग्राम समाज के खातों में दर्ज भूमि को पट्टा दिखाकर नामांतरण बही एवं पट्टा प्रमाण रजिस्टर में बिना दर्ज हुए राजस्व रिकार्ड में इसे खातेदारों के नाम कर दिया गया।
दिसंबर 2016 में तत्कालीन एसडीएम हरिशंकर लाल शुक्ल से इस मामले की शिकायत की गई थी। पुराने अभिलेखों की नकल एवं खतौनी में दर्ज नामों की सूची थी। जिसमें जिले व प्रदेश से बाहर रहने वाले लोगों के साथ ही सरकारी नौकरी करने वाले करीब 22 लोगों के नाम शामिल थे। शिकायत में करीब 12 ऐसे फर्जी पट्टेदारों के नाम भी शामिल थे, जिस नाम का कोई व्यक्ति गांव का निवासी ही नहीं था। एसडीएम ने जब कुछ भूमिधरी खाताधारकों के नाम के खातों को खंगालना शुरू किया तो किसी भी पुराने अभिलेख में इसकी पुष्टि नहीं हुई।
करीब एक हजार बीघे से अधिक की जमीन से जुड़े अभिलेख जब गोंडा अभिलेखागार से मिलाए गए तो पट्टा संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद अक्तूबर 2017 में तहसीलदार ने भूमि पर काबिज 117 लोगों को नोटिस दी, जिसमें ग्राम लालेमऊ के लोग ही शामिल थे। बसेरिया के भूमि घोटाले की जांच अभी ठंडे बस्ते में है। (संवाद)
आयुक्त के यहां विचाराधीन पत्रावली
एसडीएम करनैलगंज भारत भार्गव ने बताया कि फर्जी तरीके से सरकारी भूमि को नाम से दर्ज कराने के मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत तहसीलदार ने 117 कब्जेदारों को नोटिस देकर उनसे पट्टा संबंधी अभिलेख तलब किया था। इस दौरान पट्टे का कोई प्रमाण नहीं मिला है। पूरे मामले की गहनता से जांच हुई थी। जांच रिपोर्ट के साथ कार्रवाई के लिए पत्रावली आयुक्त कार्यालय भेजी गई है, जो विचाराधीन है।