फोटो-6 गोंडा में कर्मचारी का ईपीएफ पासबुक। -संवाद
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गोंडा। मिशन निदेशक का आदेश भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के लिए कोई मायने नहीं रखता है। इसके चलते ही विभागीय स्तर पर तैनात संविदा कर्मियों के ईपीएफ खाते में अभी तक विभागीय अंशदान जमा नहीं कराया गया है। इसे लेकर कार्यरत कर्मियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इसके घेरे में आने वाले करीब दो सौ कर्मियों ने तो ईपीएफ खाते में जमा की जाने वाली धनराशि के घोटाले तक की आशंका जतायी है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले में संविदा पर तैनात करीब 200 कर्मचारियों के ईपीएफ खाते में पिछले दस महीने से कर्मचारी व नियोक्ता का अंशदान नहीं जमा कराया गया। इसके चलते करीब 72 लाख रुपये के ब्याज में हेरफेर की आशंका जताई जा रही है। जबकि मिशन के निदेशक ने 22 मार्च को ही सीएमओ को पत्र लिखकर तीन दिन में संविदा कर्मियों के ईपीएफ खाते में विभागीय अंशदान जमा कराए जाने का निर्देश दिया था। सीएमओ दफ्तर में बैठने वाले अधिकारियों से ईपीएफ जमा कराने के संबंध में जानकारी मांगने पर सिर्फ फटकार के साथ ही नौकरी से निकालने की धमकी मिलती है।
कर्मचारियों के खाते में धनराशि जमा कराने की कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अगले एक सप्ताह के अंदर सभी कर्मचारियों के ईपीएफ खाते में धनराशि पहुंच जाएगी। अमरनाथ, डीपीएम एनएचएम