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ग्राम पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण समितियों के गठन पर जोर

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गोंडा। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने कलेक्ट्रेट सभागार में बाल संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक में किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल विवाह की रोकथाम, राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), बाल गृह शिशु विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण की प्रगति, बाल श्रम उन्मूलन से संबंधित प्रगति चाइल्ड लाइन कोलैब एवं चाइल्ड लाइन रेलवे के कार्यों, जनपद में बाल गृह की आवश्यकता पर चर्चा की।
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संप्रेक्षण गृह, कामकाजी महिलाओं के हास्टल निर्माण के लिए जमीन आवंटन, महिला सम्मान कोष के अंतर्गत मेडिकल स्तर पर लंबित प्रकरण तथा जिला संचालन समिति की बैठक विभागवार लंबित प्रकरणों की समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बाल संरक्षण समितियों का गठन कराते हुए सभी समितियों को सक्रिय किया जाय। लंबित प्रकरणों में प्रभावी पैरवी करके निस्तारित कराएं। जनपद के सभी 2713 मेडिकल स्टोर पर का सत्यापन कराते हुए अनिवार्य रूप से सीसीटीवी लगवाए जाएं तथा पुलिस विभाग के राजपत्रित अधिकारी के द्वारा सीसीटीवी की रिकार्डिंग का अवलोकन किया जाए।
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श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रमिकों को चिन्हित कर उन्हें मुक्त करायें। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि शासन की मंशा के अनुरूप बाल अपराधियों को ससमय किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कराएं तथा लंबित प्रकरणों को निस्तारित कराएं।
संप्रेक्षण गृहों में आवासित बच्चों को मानक अनुरूप सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। सीएमओ को निर्देश दिए कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के उपचार एवं उन्हें नियमानुसार मेडिकल सुविधाएं दिलाएं एवं निर्दिष्ट अस्पतालों के भर्ती कराएं।
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