गोंडा। प्रचंड गर्मी में बिजली की बढ़ी मांग से इलाके के उपकेंद्र ओवरलोड होकर हांफने लगे हैं। जर्जर सप्लाई लाइनों और कम क्षमता के ट्रांसफार्मर के लोड बढ़ते ही ट्रांसफार्मरों के फूंकने के कारण शहरी व ग्रामीण इलाकों में लोगों को भीषण बिजली संकट का सामना कर परेशानी उठानी पड़ रही है। लोड बढ़ने के कारण ही एक माह ही इलाके के 240 छोटे बड़े ट्रांसफार्मर फूंक चुके हैं। इससे पूरे जिले में बिजली सप्लाई की व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतरी दिखती है।
जिले में बिजली आपूर्ति के लिए 38 उपकेंद्र बनाए गए हैं। जहां से करीब पांच लाख उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई की सुविधा मिलती है। पिछले कुछ सालों में तेजी से विकसित हुए नए आबादी क्षेत्रों के साथ ही बिजली के संसाधन भी बढ़े लेकिन इसके अनुसार सप्लाई बेहतर रखने को ट्रांसफॉर्मर नहीं बढ़ाए गए। इतना ही नहीं लगातार मांग के बाद भी पुराने ट्रांसफार्मरों की क्षमता में भी कोई वृद्धि नहीं की गई। इसके चलते ही गर्मी में बिजली की मांग बढ़ते ही ट्रांसफार्मर ओवर लोड हो कर धड़ाम होने लगे हैं।
फूंके ट्रांसफार्मर को बदलने में ही तीन से पांच दिन का समय लग जाने के कारण ग्रामीण इलाके के लोगों को घंटों अघोषित बिजली संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। जिले के समशादपुरवा, रमवाडीह व दुबौली में पिछले सप्ताह से ही ट्रांसफार्मर खराब है, ग्रामीणों ने स्थानीय उपकेंद्र पर शिकायत की लेकिन अभी तक बदले जाने की कवायद तक शुरू नहीं हो पायी है। जबकि ग्रामीण खुद के ट्रैक्टर-ट्रॉली से ट्रांसफॉर्मर लाने व ले जाने के लिए तैयार हैं।
जिले मे बिजली व्यवस्था पर एक नजर
विद्युत वितरण खंड- 33-केवी ट्रांसफार्मर 11-केवी ट्रांसफार्मर
विद्युत वितरण खंड एक 6 31
विद्युत वितरण खंड दो - 10 37
विद्युत वितरण खंड करनैलगंज- 12 38
विद्युत वितरण खंड मनकापुर 10 34
कुल 38 140
जिले में ओवर लोड वाले ट्रांसफार्मरों को बदला गया है। तीन से अधिक बार फुंकने वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जाती है। ट्रांसफार्मरों की किसी तरह की कमी जिले में नहीं है।
रमेश चंद्र, अधीक्षण अभियंता पॉवर कारपोरेशन