फोटो-5 गोंडा में जिला अस्पताल के खाली चैंबर में ऑन एसी व लाइट। संवाद
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गोंडा। बिजली विभाग बकाया बिल राशि की वसूली के लिए आम उपभोक्ताओं पर तो सख्ती कर रहा है लेकिन बिजली बिल का करोड़ों का बकाया दबाए बैठे सरकारी विभागों पर मेहरबान है। बिजली की बर्बादी में सबसे आगे रहने और बिल चुकाने में फिसड्डी रहने वाले जिले के सरकारी विभागों पर बिजली बिल की 15.46 करोड़ की धनराशि चुकाने को बकाया है।
बिजली विभाग का बकाया दबाए बैठे यह सरकारी विभाग बिजली की बर्बादी में भी सबसे आगे रहते हैं। कलेक्ट्रेट से लेकर सरकारी अस्पतालों व अन्य जिला स्तरीय कार्यालयों में अफसर कमरों में बैठे या न बैठे कमरा ठंडा बनाए रखने को एसी लगातार चलता रहता है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डायरिया से पीड़ित होने के कारण छुट्टी पर हैं। सीएमएस की गैरहाजिरी में पूरे दिन आफिस में कोई और नहीं बैठता लेकिन कार्यालय खुलते ही कक्ष का एसी, लाइटें व पंखा चला दिया जाता है। इसी तरह जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. इंदुबाला के कार्यालय में भी किसी के मौजूद न होने के बावजूद एसी पंखा तथा लाइटें सुबह से लेकर शाम तक ऑन मिलता है। यहीं हाल सीएमओ कार्यालय, विकास भवन स्थिति अन्य कार्यालयों व तहसील मुख्यालय के कार्यालयों में भी रहती है।
बिजली बर्बादी में अव्वल इन सरकारी विभागों पर बिजली बिल की 15 करोड़ 46 लाख रुपया बिजली बिल की बकाएदारी है। इसमें अकेले गृह विभाग से जुड़े पुलिस महकमे को 1.64 करोड़, स्थानीय निकायों का एक 1.12 करोड़ , सिचाई विभाग को 1.14 करोड़, स्वास्थ्य विभाग को 97 लाख रुपया, लोक निर्माण विभाग को 55 लाख, वन विभाग 22 लाख और न्याय विभाग को 15 लाख रुपया की बकाया बिजली बिल की धनराशि चुकानी हैं।
बिजली विभाग आम उपभोक्ताओं से बकाया बिल की वसूली को लेकर सख्ती दिखाता है लेकिन बिजली की बर्बादी कर बकाया चुकाने में फिसड्डी रहने वाले सरकारी विभागों पर मेहरबान दिखता है। वर्षों से बकाएदारी होने के बावजूद इन विभागों पर पावर कारपोरेशन का हंटर नहीं चल रहा है। धड़ल्ले से बिजली की बर्बादी कर रहे सरकारी विभाग पर बिजली अदायगी की कार्रवाई सिर्फ नोटिस भेजने तक ही सिमटी रहती है। जबकि आम उपभोक्ताओं पर चार-पांच हजार की बकाएदारी पर भी कनेक्शन काट दिया जाता। इस संबंध में पावर कारपोरेशन के अधीक्षण अभियंता रमेश चंद्र का कहना है कि सरकारी विभागों को बिजली का बिल हर माह भेजा जाता है, जिनका बड़ी बकाएदारी है उन्हें रिमांडर भेजा जाता है। जब विभागों में बजट रहता है तो बिजली बिल भुगतान कर देते हैं। वहीं सभी विभागों से बिजली बचाने की अपील की गई है।