फोटो-8 गोंडा में जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज। -संवाद
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गोंडा। दिल के रोगियों की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद जिला अस्पताल में आने वाले हृदय रोगियों को इलाज के डॉक्टर तक नहीं मिल रहे। बीते तीन सालों से जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की कुर्सी खाली पड़ी है। विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण हृदय रोगियों की जांच के लिए मंगाई गई टीएटी व टू-डी इको जैसी जांच से जुड़ी मशीन व उपकरण भी बिना उपयोग के खराब हो रहे हैं। बेहतर इलाज न मिल पाने के कारण दिल के मरीजों को विवश होकर निजी अस्पतालों में जा कर महंगे इलाज को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में पिछले तीन सालों से हृदय रोगियों के इलाज की व्यवस्था पटरी से उतरी है। विशेषज्ञ डाक्टर की तैनाती न होने के कारण यहां आने वाले दिल के मरीजों की ब्लड प्रेशर व सामान्य जांच कर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे मरीजों को जान बचाने के लिए निजी अस्पतालों में इलाज को मजबूर होना पड़ता है। जिला अस्पताल में हर दिन ओपीडी में आने वाले दस से अधिक मरीजों को सामान्य जांच कर दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है।
करीब तीन साल पहले जिला अस्पताल मे हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत होने के बाद से कार्डियोलॉजिस्ट की कुर्सी खाली पड़ी है। हाल ही में कोविड अस्पताल के प्रबंधक डॉ. दीपक कुमार की हार्ट अटैक से तबियत बिगड़ी तो जिला अस्पताल में डॉक्टर व जांच की सुविधाएं न होने के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
बिना जांच के कंडम हो रहे उपकरण
जिला अस्पताल में करीब दस साल पहले हृदयरोग की जांच के लिए टीएमटी व टू-डी इको मशीनों की खरीद की गई थी। इससे मरीजों की हार्ट बीट मापकर हार्टअटैक की संभावना का आंकलन होना था। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते इन मशीनों को अब तक इंस्टाल ही नहीं किया जा सका। ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज सिर्फ ईसीजी के सहारे चल रहा है। बीते साल तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. घनश्याम सिंह ने जांच से जुड़ी कई मशीनों को कंडम तक घोषित कर दिया था।
जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति किए जाने को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। बीते दिनों ही शासन को पत्र भेजकर हृदय रोग के इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा जरूरी जांच मशीनों को उपलब्ध कराने की मांग की गयी है ताकि मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके। डॉ. इंदुबाला, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल