गोंडा। शहर के मिश्रोलिया रेलवे क्रासिंग पर बनने वाले ओवरब्रिज से पहले डायवर्जन बनाने का काम शुरू हो गया। अमर उजाला ने इस समस्या का खुलासा किया था। इसके लिए आया 1 करोड़ 35 लाख रुपये बजट को दबाने की पूरी तैयारी थी।
डायवर्जन न होने से आए दिन जाम और लोगों को गोंडा-बहराइच मार्ग पर आने जाने के लिए 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। अमर उजाला ने 12 फरवरी को बिना डायवर्जन बनाए गोंडा-बहराइच मार्ग बंद शीर्षक से प्रकाशित किया। खबर पर जांच शुरू हुई तो कार्यदाई संस्था ने डायवर्जन का निर्माण शुरू कर दिए हैं, लेकिन मानक की अनदेखी कर रहे हैं।
गोंडा-बहराइच मार्ग पर मिश्रौलिया गुमटी पर बन रहे ओवरब्रिज निर्माण शुरू होने से पहले डायवर्जन का निर्माण होना था। अमर उजाला में छपी खबर को संज्ञान लेकर लखनऊ से आई जांच टीम ने फटकारा। टीम ने डायवर्जन बनाने के बाद ओवरब्रिज पिलर को बनाने के निर्देश दिए।
सेतु निगम ने डायवर्जन ओवरब्रिज के खंभों के दोनों तरफ गिट्टी डालकर डायवर्जन बनाना शुरू कर दिया है। 10 साल से गोंडा-बाराबंकी पर समपार फाटक संख्या 262 पर ओवरब्रिज बनाने की कवायद चल रही थी। आएदिन जानकी नगर मिश्रौलिया गुमटी पर जाम की स्थिति रहती थी। बीती अक्टूबर में शासन ने गोंडा-बहराइच मार्ग पर 112 करोड़ की लागत से ओवरब्रिज निर्माण को हरी झंडी दे दी।
स्वीकृति के साथ शासन ने पांच करोड़ की धनराशि जारी कर दिए। गोंडा-बहराइच मार्ग पर ओवर व्रिज बनाने से पहले डायवर्जन बनाने के लिए 1.35 करोड़ रुपये की धनराशि मिल गई। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निर्माण निगम ने बिना डायवर्जन बनाए ही मार्ग को अवरूद्ध करके कार्य शुरू कर दिया। डायवर्जन के बजाए रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया था।
गोंडा-बहराइच मार्ग आवागमन बंद कर दिया। आने जाने वाले लोगों को मशक्कत करनी पड़ती थी। कचहरी रेलवे स्टेशन से घूम कर चन्दवतपुर, कटरा बाजार, कौड़िया, आर्यनगर से होकर बहराइच जाना पड़ता था। लगभग 20 किमी अतिरिक्त चल के जाना पड़ता था।
ओवरब्रिज निर्माण कार्य बंद करके पहले डायवर्जन बनाया जाए ताकि छोटे वाहन, एंबुलेंस, पुलिस की गाड़ी को आने-जाने के लिए परेशानी न हो। ओवर ब्रिज बनाने का कार्य रोककर अब डायवर्जन का निर्माण कार्य किया जा रहा है। अभी तक ओवरब्रिज पर न परियोजना का नाम व न अन्य जानकारी का बोर्ड लगाया गया है।
ओवरब्रिज बनाने के लिए 112 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इसमें ब्रिज निर्माण के साथ भूमि अध्यापित करने, बिजली की आपूर्ति, आरईपोल, सर्विस रोड, डायवर्जन सुंदरीकरण सहित सभी कार्य को कार्यदाई संस्था को कराना है।
डायवर्जन का कार्य सबसे पहले करना होता है इसके बाद निर्माण का कार्य कराना होता है पुल निर्माण से पहले डायवर्जन के लिए 1:35 करोड़ की लागत तय की गई। इसके बाद निर्माण पूरा होने पर सर्विस लेन का निर्माण कराना होगा। जिसके निर्माण के लिए 223 लाख खर्च होंगे।
इनसेट
- जिले में निर्माण कार्यों पर पूरी नजर रखी जा रही है। निर्माण कार्य में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाती है। अब डायवर्जन का निर्माण शुरू हुआ है। इसके लिए कार्यदाई संस्था को निर्देश दिया गया था।
- मार्कंडेय शाही, जिलाधिकारी