गोंडा। सरकारी टेंडर में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक को अदालत से राहत मिल गई है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) नित्या पांडेय की अदालत ने आरोपी विद्याभूषण मिश्र की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही धनराशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
मोतीगंज निवासी वादी मनोज पांडेय ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि बेसिक शिक्षा विभाग में फर्नीचर आपूर्ति के लिए उनकी फर्म का चयन जेम पोर्टल से हुआ था। इसके बाद कार्य दिलाने के नाम पर बीएसए अतुल कुमार तिवारी, जिला समन्वयक (जेम) प्रेम शंकर मिश्र और जिला समन्वयक (निर्माण) विद्याभूषण मिश्र ने अवैध धनराशि की मांग की। आंशिक भुगतान के बावजूद शेष रकम के लिए लगातार दबाव बनाया गया। रकम न देने पर टेंडर निरस्त कराने और फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी गई। बाद में कुछ धनराशि वापस की गई, लेकिन शेष रकम नहीं लौटाई और अभद्र व्यवहार करते हुए आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न किया गया। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण के आदेश पर कोतवाली नगर में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। विवेचना में साक्ष्य मिलने के बाद 18 मार्च 2026 को पुलिस ने आरोपी विद्याभूषण मिश्र को गिरफ्तार किया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की दलीलें सुनने और मामले के तथ्य व परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने जमानत मंजूर कर ली।