घाघरा नदी का जलस्तर गुरुवार की सुबह से कम होना शुरू हो गया है। जिससे गुरुवार को कोई नया गांव बाढ़ से प्रभावित नहीं हुआ। अलबत्ता जिन 10 गांवों के 95 मजरों में पानी घुसा है, वहां के लोगों को बाढ़ जैसे हालातों से जरूर जूझना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव व राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ व एसडीआएफ के साथ पुलिस व पीएसी की अलग-अलग टीमें लगी हुई हैं। वहीं ग्रामीणों की नींद नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर पर टिकी हुई है। क्योंकि अगर घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ता है तो इससे कई और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
बीते 72 घंटों से करनैलगंज इलाके में एल्गिन-चरसड़ी और रिंग बांध कटने के बाद से हाय-तौबा मची हुई है। नदी का पानी बंधे को काटने के बाद आसपास के 10 किलोमीटर इलाके में फैल गया है। जिससे तहसील क्षेत्र करनैलगंज के 10 गांव बाढ़ के पानी में घिर गए हैं।
इन गांवों में नकहरा, काशीपुर, गौरा सिंहनापुर, घरकुईंया, प्रतापपुर, पूरे अजब, पूरे अंगद, रेक्सडिय़ा आदि गांव शामिल हैं। जहां के लोगों की जिंदगी बाढ़ के पानी से नरक बन गई है।
घर से लेकर खेतों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। जबकि तमाम लोगों के आशियाने बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं। वहीं 6 हजार एकड़ में लगी किसानों की फसल भी बाढ़ के पानी में डूबने से बेकार हो गई है।
गश खाकर गिरी महिला आरक्षी
गुरुवार को पाल्हापुर बाढ़ चौकी में मंच के सामने ड्यूटी करते वक्त अचानक महिला सिपाही भावना गश खाकर गिर पड़ीं। जिन्हें तत्काल साथी आरक्षी लेकर एक कमरे में पहुंचे। जहां उनका इलाज किया गया। वहीं मंच के ठीक सामने घटी इस घटना के बाबत न तो अधिकारी कुछ बोले, न ही नेता।
बाढ़ पीड़ितों में बांटी राहत सामग्री
गुरुवार को सिंचाई मंत्री ने पाल्हापुर बाढ़ चौकी पर आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन के बाद नकहरा, प्रतापपुर, काशीपुर सहित 10 गांवों और उनके मजरों से आए बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितो की मदद में किसी तरह की खामी न रहे, इसके लिए 50 लाख रुपए की अतिरिक्त व्यवस्था भी की है। अभी तक जिला प्रशासन बाढ़ आपदा निधि में पड़ी 20 लाख रुपए की धनराशि से ही बचाव व राहत के कार्य कर रहा था।