गोंडा। हादसे में किसी की मौत हो जाए या फिर किसी और घटना में। जिला अस्पताल की मर्च्युरी से बिना खर्चा किए शव पोस्टमार्टम पहुंचाना आसान नही हैं। ऐसा ही कुछ मामला बुधवार को मर्च्युरी में एक गरीब की बेटी की मौत पर शुरू हुआ तो डीएम तक मामला पहुंचा। डीएम की दखल के बाद सीएमओ मौके पर पहुंचे, उन्होंने परिजनों से बात की। फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की व्यवस्था कराई। कई घंटे तक कोतवाली के पुलिसकर्मी गायब रहे, उन्हें तलाशना पड़ा।
मामला धानेपुर के बेलहरी गांव के राम विजय से जुड़ा है। उनकी बेटी ज्योति की मंगलवार को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बेटी के मौत से बदहवास राम विजय से शव को सील करके पोस्टमार्टम को भेजने के लिए छह हजार रुपये की मांग हुई। गांव के लोगों को जानकारी हुई और मामला जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार के पास पहुंचा। जिलास्तरीय बैठक कर रहे थे, जहां सीएमओ मौजूद थे। उन्होंने बैठक से सीएमओ को जिला अस्पताल भेजा। मर्च्युरी के कर्मचारियों से जानकारी की और फिर शव भेजने के निर्देश दिए, लेकिन काफी देर तक कोतवाली नगर के पुलिस कर्मी मर्च्युरी नहीं पहुंचे। काफी खोजबीन के बाद पुलिसकर्मी पहुंचे, उसके बाद भी एक हजार रुपये पीड़ित को खर्च करना पड़ा।
जिला अस्पताल के मर्च्युरी में मृतकों के परिजनों से रुपये लिए जाने का मामला नया नहीं है। अक्सर ऐसा होता है, ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं और रुपये देकर शव भिजवा देते हैं। इस पूरे खेल में पुलिस की भूमिका काफी अहम होती है। पुलिस तब तक कोतवाली से नहीं जाती है, जब तक सौदा तय नहीं हो जाता है। इस बार डीएम के संज्ञान में आने पर विभाग हरकत में आया है। जबकि, कोतवाल पंकज सिंह का कहना है कि पुलिस समय से पहुंचती है। पुलिस पर आरोप निराधार है।
मर्च्युरी के कार्मिक को हटाने की कार्रवाई में जुटा स्वास्थ्य विभाग
जिला अस्पताल की मर्च्युरी में मृतक के परिजनों से रुपये मांगने पर कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी न चाहते हुए भी कार्रवाई कर रहे हैं। दबे मन से कहते हैं कि शव को सील करने के लिए कोई तैयार नहीं होता है। किसी तरह कोई काम करता है, अब कार्रवाई करने से मर्च्युरी में दिक्कत होगी। वहीं विभाग में अब कार्रवाई करने के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।
मर्च्युरी में मृतक के परिजनों से रुपये लिए जाने की शिकायत मिली थी। जांच की गई है और कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। पुलिस कर्मी की भूमिका पर कोई टिप्पणी नहीं की। डॉ. एसके रावत, सीएमएस जिला अस्पताल