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346 मरीजों के लिए संजीवनी बनी डायलिसिस यूनिट

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फोटो-10 गोंडा के जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस यूनिट में मरीजों का खून फिल्टर करते स्वास्थ्यकर्मी। - फोटो : GONDA
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गोंडा। किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे 346 मरीजों के लिए जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट वरदान साबित हो रही है। पड़ोसी जिले के भी 44 मरीज यहां मुफ्त डायलिसिस करा रहे हैं। वर्ष 2019 से अब तक पंजीकृत मरीजों की 15,406 बार डायलिसिस की जा चुकी है।
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जिला अस्पताल में सीएमओ कार्यालय के पीछे स्थित डायलिसिस यूनिट किडनी के गरीब मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। किडनी के मरीजों की डायलिसिस के लिए निजी अस्पतालों में तीन हजार से चार हजार रुपये तक का शुल्क लिया जाता है। गंभीर मरीजों को सप्ताह में दो बार तक डायलिसिस करानी पड़ती है, जिससे उन्हें प्रत्येक महीने औसतन 30 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। 11 सितंबर 2019 को जिले में स्थापित डायलिसिस यूनिट से किडनी के मरीजों को संजीवनी मिल गई। आर्थिक रूप से कमजोर लोग निशुल्क डायलिसिस कराकर अपनी जिंदगी का पहिया आगे बढ़ा रहे हैं। यूनिट शुरू होने से अब तक 346 मरीज पंजीकृत किये जा चुके हैं। इन्हें आवश्यकतानुसार सप्ताह या महीने में डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। अब तक पंजीकृत मरीजों की 15,406 बार डायलिसिस की जा चुकी है। डायलिसिस यूनिट में आठ स्वास्थ्यकर्मी सेवा दे रहे हैं। (संवाद)
दस बेड पर हो रहा इलाज, दो बेडों की दरकार
डायलिसिस यूनिट में नौ बेडों पर सामान्य मरीजों के लिए मशीनें लगाई गईं हैं। एक बेड पर हेपेटाइटिस-सी के मरीजों की डायलिसिस होती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हेपेटाइटिस-सी के मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण इन मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। इस समय हेपेटाइटिस-सी के छह मरीज प्रतीक्षारत हैं। जनवरी महीने में जिला अस्पताल के तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. एसके रावत ने हेपेटाइटिस-सी के मरीजों के लिए दो बेड और बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन अभी तक मशीनें नहीं मिल पाईं।
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डायलिसिस पर चल रही अरविंद की जिंदगी
धानेपुर के अरविंद शुक्ल की जिंदगी डायलिसिस पर चल रही है। यूनिट के प्रबंधक सौरभ शर्मा ने बताया कि अरविंद को हर तीसरे दिन डायलिसिस करानी पड़ रही है। वर्ष 2019 में इनका पंजीकरण किया गया था। तब से अब तक करीब 300 बार डायलिसिस की जा चुकी है। ऐसे ही बहराइच के नानपारा की किरन मिश्रा की भी 230 बार डायलिसिस हो चुकी है। करनैलगंज के रईस अहमद, शहर के योगेंद्र मौर्य, बाबूराम आदि की यूनिट शुरू होने के बाद से ही नियमित डायलिसिस की जा रही है।
इस लिए होती है डायलिसिस
डायलिसिस यूनिट के नोडल प्रभारी डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि शरीर में गुर्दे का काम खून से यूरिया व क्रिएटिनिन को छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकालना है। गुर्दा खराब होने पर मरीज के शरीर में यूरिया व क्रिएटिनिन बढ़ने लगता है। दोनों का स्तर पांच से अधिक होने पर मरीज को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। इसमें कृत्रिम गुर्दे से खून छानकर दोनों तत्वों को निकाला जाता है। जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट मेें अब तक 346 लोगों का पंजीकरण कर सुविधा दी जा रही है।
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