करनैलगंज में एल्गिन-चरसड़ी ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर समय के साथ कभी बढ़ जाता है तो कभी कम हो जाता है। सोमवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने लगा था। लेकिन मंगलवार को सुबह यही जलस्तर फिर से बढ़ना शुरू हो गया और शाम 6 बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 14 सेमी ऊपर पहुंच गया।
वहीं घाघरा के बढ़ते ही सरयू नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। घाघरा नदी में बढ़ने वाले जलस्तर से करनैलगंज इलाके में लोगों की दिक्कतें लगातार पहले जैसी बनी हुई हैं। जिससे उन्हें कोई राहत दूर-दूर तक मिलने का नाम नहीं ले रही। नदी का पानी लगातार एल्गिन-चरसड़ी बांध को काट रहा है।
जबकि काफी संख्या में इसका पानी करनैलगंज के गांवों में भी भर रहा है। नदी का जलस्तर बढने से प्रभावित गांवों की संख्या में इजाफे का अनुमान है। वहीं बाढ़ के पानी से प्रभावित मजरों की संख्या अभी भी 60 ही है।
पिछले साल कटे एल्गिन-चरसड़ी व रिंग बांध से करनैलगंज में जलप्रलय की आपदा ने लोगों को बाढ़ सीजन के शुरूआती दिनों मे ही इस कदर घेर लिया है कि इससे उन्हें अगले एक महीने तक किसी प्रकार की कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही।
हालत यह है कि जिस जगह पिछले साल बांध 500 मीटर की दूरी मे कटा था, उसका दायरा अब बढक़र सवा दो किलोमीटर के आसपास पहुंच गया है। जिससे काफी संख्या में पानी का फैलाव करनैलगंज इलाके में होने लगा है। वहीं घाघरा से आने वाली बाढ़ का पानी करनैलगंज में बंधे किनारे बसे गांवों को प्रभावित न करे, इसके लिए बनाए गए नोज भी एक के बाद घाघरा की लहरों में समाने लगे हैं।
नदी का जलस्तर जब कम होता है तो बंधे के नोजों में कटान लग जाती है और जब पानी बढ़ता है तो वही पानी गांवों में फैलना शुरू हो जाता है। बीते 10 दिनों से करनैलगंज इलाके में चल रही बाढ़ से यहां के 60 मजरे बाढ़ के पानी से चौतरफा घिरे हैं।
जबकि हफ्ते भर से हो रही बरसात ने लोगों की दिक्कतों को कई गुना तक बढ़ा रखा है। प्रशासन की ओर से जो इंतजाम बाढ़ पीड़ितों के लिए किए गए हैं। वह भी नाममात्र के ही हैं। जिससे लोगों को कोई राहत मिलती नहीं दिखाई दे रही। मंगलवार को घाघरा के बढ़ते-घटते जलस्तर ने यहां के लोगों को बहुत परेशान किया।
सोमवार की रात नदी का जलस्तर जहां कम होने लगा था तो वही जलस्तर मंगलवार सुबह बढना शुरू हो गया और दोपहर मे फिर से कम होना। लेकिन जैसे ही शाम हुई पहाड़ी नालों से नदी में छोड़े जाने वाले पानी से नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 14 सेमी ऊपर पहुंच गया।
मंगलवार को दिन में घाघरा ने पहले तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ना शुरू किया। लेकिन बाद में जैसे ही कुछ समय बीता नदी के बढ़ने की रफ्तार ठंडी पड़ गई और नदी दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने लगी। मौजूदा वक्त भी नदी का बढ़ाव दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से हो रहा है।