घाघरा-सरयू नदी के बीच से होकर गोंडा आएगी बिजली
गोंडा। बिजली की अघोषित कटौती झेल रहे देवीपाटन मंडल को अगले 5 साल तक कटौती मुक्त रखने के लिए पावर कॉर्पोरेशन घाघरा-सरयू नदी के बीच मिड रिवर फाउंडेशन बेस पर एक ऐसी लाइन का निर्माण करने जा रहा है, जिससे गोंडा सहित मंडल के किसी भी जिले में अगले पांच साल बाद बिजली की कोई किल्लत नहीं रह जाएगी।
400 केवी पावर ग्रिड सोहावल से घाघरा-सरयू नदी को पार करके गोंडा आने वाली इस लाइन से 500 एम्पियर बिजली गोंडा को तब तक के लिए मिलती रहेगी। जबतक कि तरबगंज के लौव्वाटेपरा में निर्माणाधीन 400 केवीए बिजलीघर पूरी तरह से चालू नहीं हो जाता। पावर कारपोरेशन की योजना इस पूरे प्रोजेक्ट पर 50 करोड़ खर्च करने की है।
जिससे से 41 किलोमीटर का लाइन नेटवर्क जमीन पर टावर खड़ा किया जाएगा। जबकि तीन किलोमीटर लाइन घाघरा-सरयू नदी के बीच 35-40 मीटर गहराई में मिड रिवर फाउंडेशन बेस पर खड़ी की जाएगी।
...तो इसलिए गोंडा में गहराया बिजली संकट
तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 करोड़ रुपए की लागत से जिस 400 केवीए बिजलीघर का निर्माण पिछले 7 वर्षों से हो रहा है, अगर वह तय समय में (5 साल के भीतर) चालू हो गया होता, तो पूरे देवीपाटन मंडल में बिजली का कोई संकट कभी न होता। लेकिन दुर्भाग्य है कि यह बिजलीघर अभी भी 55 फीसदी अधूरा है।
जबकि मंडल में बिजली खपत का ग्राफ बढ़ते-बढ़ते 1200 एम्पियर (350 मेगावाट) के ऊपर पहुंच चुका है। इसमें से हर दिन केवल 850 एम्पियर बिजली ही गोंडा को सोहावल व बस्ती से होकर आने वाली 220 केवी लाइनों से मिल पाती है।
पहले मंडल में दो आईपीपी (इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर) चालू थी, जिनके जरिए 564 एम्पियर बिजली कॉर्पोरेशन को मिल जाती थी। जिसका परचेज एग्रीमेंट पावर कारपोरेशन 6 महीने पहले ही रद्द कर चुका है।
सवा करोड़ आबादी को मिलेगी बिजली कटौती से राहत
देवीपाटन मंडल को बोते 6 महीनों से 500 एम्पियर बिजली पावर कॉर्पोरेशन से कम मिल रही है। इस वजह से आए दिन किसी न किसी जिले की बिजली कटी रहती है। जिसका सामना मंडल की सवा करोड़ आबादी को रोज ही करना होता है।
ऐसे में मंडल के चार जिलों में रह रहे लोगों के लिए पावर कारपोरेशन का यह प्लान उन्हें काफी राहत देने वाला है। क्योंकि जबतक लौव्वाटेपरा का बिजलीघर बनकर चालू नहीं हो जाता, तबतक के लिए 500 एम्पियर अतिरिक्त बिजली का इंतजाम सोहावल 400 केवी पावर ग्रिड की लाइन से गोंडा को होता रहेगा।
सीईए की अनुमति के बाद शुरू हो जाएगा काम
घाघरा-सरयू नदी के बीच बिजली के टावर खड़े करके सोहावल (फैजाबाद) से गोंडा लाई जाने वाली 44 किलोमीटर लाइन का काम जनवरी-फरवरी महीने में चालू होने की उम्मीद है। हालांकि इससे पहले इस पूरे प्रोजेक्ट को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी एथारिटी में सेंक्शन किया जाएगा।
क्योंकि तभी जाकर इसका काम यहां हो पाएगा। जिसके लिए इसकी फाइल पावर कारपोरेशन के सीएमडी ट्रांसमिशन कामरान रिजवी, डायरेक्टर फाइनेंस, डायरेक्टर आपरेशन, डायरेक्ट वक्र्स एंड प्रोजेक्ट, डायरेक्टर कामर्शियल एंड प्लानिंग के अनुमोदन के बाद सीईए दिल्ली को भेजी जा चुकी है। जहां सीईए की अगली बैठक में इसपर फैसला होना है।
नदी के बीच 18 करोड़ से खड़े होंगे टावर
400 केवी सोहावल पावर ग्रिड से घाघरा-सरयू नदी को पार कराकर गोंडा लाई जाने वाली 220 केवी लाइन के 3 किलोमीटर दूरी में 6 टावर ऐसे होंगे, जिनका निर्माण घाघरा-सरयू नदी के बोचीबीच किया जलएगा। नदी के बीच 35-40 मीटर की गहराई में पहले तो इन टावरोलं का पिलर ढाला जाएगा।
जिसके बाद इन्हीं पिलरों पर टावर खड़े करके 220 केवी की लाइन खींची जाएगी। हालांकि ट्रांसमिशन लाइन के एक पिलर से दूसरे पिलर की दूरी वैसे तो 380 मीटर होती है। लेकिन नदी होने के कारण मिड रिवर फाउंडेंशन बेस पर तैयार किए जाने वाले इन पिलरों की एक दूसरे से दूरी इस्टीमेट में 600 मीटर रखी गई है। इस दूरी में कुल 6 पिलर खड़े किए जाने हैं। जिनका काम हिंदुस्तान की उन चुनिंदा फर्मों से कराया जाएगा। जो इसमें माहिर हैं।
मंडलवासियों को बिजली की किल्लत से निजात दिलाने के लिए इस पूरे प्रोजेक्ट की डीपीआर एक महीने पहले ही मेरठ से सर्वेयर को बुलाकर तैयार की गई थी। जिसे सीएमडी ट्रांसमिशन की पूरी कमेटी एप्रूव भी कर चुकी है। अब इस पर आखिरी फैसला केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को करना है। सीईए से मंजूरी मिलने के बाद इसका काम चालू करा दिया जाएगा।
-सीपी पाण्डेय, एक्सईएन ट्रांसमिशन गोंडा