फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिपाही हत्याकांड में चार महीने बाद हो सका बयान

विज्ञापन
विज्ञापन
गोंडा। पुलिस में एक आरक्षी की हत्या मामले की जांच पूरी कराने के लिए परिजन धक्के खा रहे हैं। लंबी कवायद के बाद चार माह बाद पुलिस ने परिजनों का बयान लिए और उस कमरे का ताला खुलवाकर निरीक्षण किया, जहां सिपाही की मौत हुई थी। 12 मार्च की सुबह कोतवाली देहात परिसर में स्थिति आरक्षी आवास में सिपाही आशीष कुमार मल्ल की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। नगर कोतवाली में मृतक के पिता देवेंद्र कुमार मल्ल ने हत्या का मामला दर्ज कराया था। विवेचना नगर कोतवाल कर रहे हैं और अब जाकर परिजनों के बयान हो सके हैं। पुलिस अपने ही विभाग के आरक्षी के मौत मामले की जांच कर रही है।
विज्ञापन

कोतवाली देहात में जनपद मऊ के निवासी देवेंद्र कुमार मल्ल के इकलौते बेटे आशीष कुमार मल्ल की तैनाती आरक्षी के पद पर थी। 11 मार्च को सिपाही आशीष का जन्मदिन था और उसने जन्मदिन मनाया भी। सुबह उसका शव कमरे में लटकता मिला। परिजनों का आरोप है कि उसके बेटे की हत्या की गई है। साक्ष्य में एक वीडियो की सीडी भी सौंपी है जोकि शव उतारते समय की है। पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। परिजनों की ओर से मांग की गई कि उनके बयान लिए जाएं, सभी के बयान लिए गए। उस कमरे को खुलवाकर भी नगर पुलिस ने देखा, जहां सिपाही का शव मिला था। परिजनों ने अपने बयान में करीब 12 लोगों के नाम भी दिए हैं और मांग किया है कि सभी से पूछताछ हो। एक लड़की का नाम देते हुए उसके फोन की डिटेल व परिजनों के फोन की डिटेल निकालकर जांच करने की मांग किया है। बयान देने वाले प्रेम सागर ने बताया कि जांच हो तो सच्चाई सामने आ जाएगी। आशीष के पिता देवेंद्र कुमार मल्ल ने हत्या का आरोप लगाते हुए जांच करने की मांग किया है। सभी ने बयान की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को भी दी है। उन्हें आशंका है कि नगर पुलिस बयान में बदलाव कर सकती है।
मृतक आश्रितों को नहीं मिली कोई सहायता
- सिपाही मौत मामले में एफआईआर जांच तो बाधित है ही, साथ ही आगे मिलने वाली कोई सहायता भी परिजनों को उपलब्ध नहीं हुई है। मऊ से आए आशीष के पिता देवेंद्र कुमार मल्ल ने पुलिस अधीक्षक से मांग किया है कि जीविकोपार्जन के लिए तय सुविधा दिलाई जाए। बताया कि अभी तक बीमा, एनपीएस का भुगतान तक नहीं हुआ है। पारिवारिक पेंशन व अनुकंपा धनराशि भी नही मिली है। इसके अलावा अवकाश के बदले नकदीकरण, अनंतिम उपादान, सामूहिक बीमा भुगतान, पुलिस बेनीफिट फंड, पर्सनल दुर्घटना कोई भी देय धनराशि नही मिली है। इकलौता बेटा था और वही जीविका का साधन था। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें