जहां एक ओर लोगों को कोरोना से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। हाल ये है कि करनैलगंज में दो कोरोना पॉजिटिव व्यक्तियों को लाने में स्वास्थ्य विभाग का निरंकुश रवैया सामने आया है। कंट्रोल रूम के फोन पर ग्रामीण पूरी रात फोन करते रहे लेकिन 30 किलोमीटर की दूरी तय करने में स्वास्थ्य टीम को 22 घंटे से अधिक का समय लग गया।
सोमवार शाम जिले में 8 कोरोना संक्रमित मामले सामने आये जिसमें करनैलगंज क्षेत्र के भी युवक शामिल थे। यहां के कचनापुर डीहा में एक 32 वर्षीय युवक 4 जून को दिल्ली से आया था। 20 जून को उसका सैंपल भेजा गया था। दूसरा 22 वर्षीय युवक इसी ग्राम पंचायत के मजरा बसुहा का है। जो कि 16 जून को कश्मीर से आया था। उसका भी सैंपल 20 जून को भेजा गया था। बताया जा रहा है कि दोनों में कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे थे। दोनों युवकों की सेंपल रिपोर्ट सोमवार को पॉजिटिव आने के 22 घंटे बाद उस गांव में स्वास्थ्य टीम पहुंची और दोनों को कोविड लेवल-1 अस्पताल ले गई, जबकि गोंडा से करनैलगंज के कचनापुर गांव की दूरी लगभग 30 किलोमीटर ही है। ऐसे कोरोना के प्रति स्वास्थ्य विभाग की संजीदगी साफ दिख रही है। इससे संक्रमण को और फैलने का मौका मिलेगा।
बताया जा रहा है कि कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी जब लापरवाही बरतते हुए गांव से संक्रमित युवक को मंगलवार दोपहर तक कोविड अस्पताल नहीं लाया गया तो उसकी शिकायत डीएम डॉ. नितिन बंसल से कई गई। इस पर उन्हें भी जिम्मेदार अफसरों ने गलत जानकारी दी और कहा कि मरीज लाया जा चुका है। मंगलवार दोपहर लगभग एक बजे एंबुलेंस गांव पहुंची है और दोनों को कोविड लेवल-1 ले आई है।
बता दें कि ये कोई पहला मामला नहीं है, पहले भी ऐसे केस सामने आये हैं। कुछ दिन पूर्व ही मनकापुर में एक कोरोना पॉजिटिव पाया गया था तो समय से एंबुलेंस न मिलने कोरोना संक्रमित का भाई ही उसे सीएचसी तक लेकर आया था।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि दोनों की सैंपलिंग करनैलगंज के क्वारंटीन सेंटर स्वामी विवेकानंद में ही हुई थी। जिले से रेंडम सैंपलिंग की टीम आई थी। इनमें कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे इसलिए इन्हें होम क्वारंटीन रहने को कहा गया था।
पूर्व राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह भी स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही से परेशान दिखे। उन्होंने बताया कि जब विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला तो सबने उन्हें फोन करना शुरू किया। एसडीएम ने फोन पर असमर्थता जताई तो फिर डीएम को फोन मिलाया तब जाकर दोपहर 1 बजे के एंबुलेंस गांव में पहुंची।