प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार एग्री जंक्शन को सहकारिता विभाग ने ठेंगा दिखा दिया है। एग्री जंक्शन को सहकारिता ने अब इफको व कृभको की ओर से दी जाने वाली रासायनिक उर्वरकों को देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
सहकारिता विभाग के प्रदेश आयुक्त ने सहकारिता के सभी संस्थानों को एग्री जंक्शन को रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति करने से मना कर दिया है। इससे एग्री जंक्शन के संचालकों में खलबली मच गई है। योजना के चयनित लाभार्थी कृषि विभाग व कृषि मंत्री के घर का चक्कर लगा रहे हैं।
प्रदेश के आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता किशन सिंह अटोरिया ने अपने विभाग के अफसरों को निर्देश देकर कहा है कि एग्री जंक्शन को सहकारिता के उर्वरकों की बिकी की जा रही है। इससे सहकारिता के उर्वरक कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। एग्री जंक्शन प्राइवेट दुकानें हैं, यह सहकारी संस्थाएं नहीं हैं। आयुक्त ने इफको व कृभको की ओर से एग्री जंक्शन को पहले दी गई रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति क ी सहमति को वापस लेने को कह दिया है।
से में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारे में सीएम व उनके चाचा मंत्री के बीच शीत युद्ध को कारण मानकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं एग्री जंक्शन के संचालक ाें में खलबली मच गई है। निजी क्षेत्रों के उर्वरकों के साथ सहकारिता के ब्रांड के उत्पादों की बिक्री कर बेहतर लाभ कमाने का सपना संजोए बेरोजगार संचालक कृ षि विभाग के अधिकारियों से रोना रोने के साथ अपना दुखड़ा अब कृषि मंत्री के दरबार में ले जाने वाले हैं।
पिछले साल सीएम ने अपने आम बजट में किसानों को गांव के नजदीक आसानी से उर्वरक मुहैया कराने के साथ बीएससी-एजी पास बेरोजगारों को रोजगार दिये जाने के उद्देश्य से न्याय पंचायतवार एग्री जंक्शन स्थापित करने का एलान किया था।
इसे सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार किया जा रहा था, जिसे सहकारिता विभाग ने ठेंगा दिखा दिया है। सहकारिता ने एग्री जंक्शन को सहकारिता की खाद की आपूर्ति ठप कर दी है। वहीं, सहकारिता विभाग की ओर से अचानक खाद की आपूर्ति पर रोक लगा दिये जाने से प्रदेश भर के करीब 1600 एग्री जंक्शन संचालकों को झटका लगा है।
उप कृषि निदेशक गोंडा डॉ. मुकुल तिवारी ने कहा कि एग्री जंक्शन सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसका उद्देश्य शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ न्याय पंचायत स्तर पर किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध कराना था। सहकारिता द्वारा उन्हें अब इफ्को/कृभकों की ओर से खाद दिये जाने को मना कर दिया गया है।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारी समितियां गोंडा राम सजीवन वर्मा का कहना है कि सहकारिता आयुक्त की ओर से निर्देश दिया गया है कि एग्री जक्ंशन को सहकारिता के उर्वरकों की आपूर्ति न की जाए। इससे सहकारिता के कारोबार प्रभावित हो रहे थे। इस पर जिला प्रबंधक पीसीएफ को पत्र भेज कर एग्री जंक्शन को उर्वरकों की उठान न करने के निर्देश दिए गए हैं।
एग्री जंक्शन योजना का फैक्ट फाइल
लाभार्थियों को पांच प्रतिशत की दर से 3.50 से 4.00 लाख रुपये लोन।
अधिकतम अनुदान 50 हजार रुपये।
भवन किराया एक साल तक 1000 रुपये प्रति माह।
जिले में कुल चयनित लाभार्थी- 23।
लाभार्थी जिन्हें बैंक ने लोन किया- 04।