गोंडा। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण होने से गोंडा में भी पर्यटन की उम्मीद जगी है। त्रेतायुग में गोंडा अहम भूमिका था और कई पौराणिक स्थल ऐसे हैं जो सीधे रामायण काल से जुड़े हैं। यहां भगवान श्रीराम की गोचर भूमि तो है ही महुुआ पाकड़ भी है जहां श्रवण कुमार को तीर लगा था। इसके साथ ही रामचरित मानस के रचयिता गोस्वाती तुलसीदास की जन्मस्थली भी है। ऐसे कई स्थलों के विकास की उम्मीद अब जगी है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का दिन करीब आ रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का आगाज अयोध्या से पहले गोंडा जिले से 1947 में हुआ था। इसके साथ ही रामायण काल की यादों को ताजा करने वाले कई ऐतिहासिक स्थल जिले में हैं। जिसमें सरयू तट पर बसे गावों के साथ ही छपिया के महुआ पाकड़ गांव आज भी रामायण काल की कथा कहते दिख रहा है। गोंडा से अयोध्या की भव्यता और भी बढ़ती है। इससे अब मंदिर निर्माण के साथ ही जिले के पौराणिक स्थलों के विकास की उम्मीद जगी है।
गोंडा जिले का पौराणिक इतिहास भगवान श्रीराम से ही जुड़ा है। प्राचीन काल में कोशल महाजनपद का भाग था। ऐसा माना जाता है कि अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम की गायें इसी क्षेत्र में चरा करती थीं। गोंडा जिले की शुरुआत नवाबगंज से ही होता है और नवाबगंज गेटवे आफ अयोध्या कहा जाता है। गायों के चरने व रंभाने से जिले को गोनर्द नाम से जाना जाता था, जो कालान्तर में अपभ्रंश होकर गोंडा कहलाया। डॉ. श्रीनरायन तिवारी ने गोनर्दीय पतंजलि पुस्तक में इस बात का उल्लेख किया है कि गो-अड्डा था जिसे चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी माना था। वह कोशल राज की धरती पर ही पहुंचा था। कालांतर में गो-अड्डा का नाम गोंडा हो गया। नवाबगंज से ही सटे वजीरगंज के कोंडर गांव में महाभाष्यकार पतंजलि की जन्मभूमि भी मानी जाती है। पतंजलि को गोनर्दीय पतंजलि भी कहा जाता है।
सूकर खेत रामचरित मानस के रचयिता तुलसीदास की जन्मस्थली है और वहीं पसका में प्रसिद्ध बाराह भगवान का मंदिर है और महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरि दास का आश्रम भी है। इस तरह क्षेत्र सीधे भगवान श्रीराम से जुड़ा है और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण से यहां का महत्व बढ़ गया है। रामायण सर्किट में पहले ही 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में 80 गांव शामिल थे। इसी बीच राम मंदिर निर्माण के प्रयासों के साथ ही अयोध्या विकास प्राधिकरण के दायरे में नवाबगंज नगर पालिका के 25 वार्ड के साथ ही ब्लॉक के 62 गांवों को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही दुर्गागंज माझा में पहले से ही रामकथा स्थल के विकास की योजना तैयार हो रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से अयोध्या के साथ गोंडा के भी कायाकल्प की उम्मीद जगी है।
पौराणिक स्थल के विकास होने से बढ़ेगा पर्यटन
नवाबगंज अयोध्या के सरयू तट से जुड़ा है, कई पौराणिक स्थलों से भी जिले का अधिकांश भाग जुड़ा है। नवाबगंज के चौखड़िया गांव में ही ब्रास्त्रोत संगम स्थल है तो गोकुला में लक्ष्मीकुंड मंदिर की भव्यता है। इसके साथ ही महंगुपुर में कपिल मुनि का आश्रम है जहां हर साल आयोजन होते हैं। ये तीनों गांव अयोध्या विकास प्राधिकरण में शामिल होने वाले 62 गांवों में शामिल हैं। नवाबगंज के आसपास स्थित तरबगंज के परास गांव में जहां ऋषि पराशर का आश्रम हैं तो अमदही में महाविद्वान व राजा जनक के दरबार में शास्त्रार्थ करने वाले गुरु अष्टावक्र का आश्रम भी है। जमथा में ऋषि यमदग्नि आश्रम हैं तो उमरी मां बाराही देवी मंदिर है। वहीं छपिया में स्वामी नरायण मंदिर है जो विश्व में प्रसिद्ध भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली है। इसके अलावा महुआ पाकड़ में श्रवण कुमार का स्थल है। इस तरह रामायण काल के साथ ही कई पौराणिक स्थलों से जिला जुड़ा है। इसके साथ ही खरगुपुर में स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर, शहर के दुखहरनाथ मंदिर समेत कई मंदिरों और सरयू तट के विकास से भी जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
जिले के 62 गांव व 25 वार्ड जुडे़ंगे अयोध्या प्राधिकरण से
अयोध्या विकास प्राधिकरण में गोंडा जिले के नवाबगंज नगर पालिका के 25 वार्ड के साथ ही 62 गांवों को शामिल किया जा रहा है। इससे जिले के 351 हेक्टेयर क्षेत्रफल और दो लाख की आबादी सीधे विकास प्राधिकरण से जुड़ जाएगी। नवाबगंज के कोल्हमपुर इमाम, चकरसूल, चौबेपुर, हरवंशपुर, बल्लीपुर सोनी, शाहपुर, इकडंगा, अकबरपुर, महंगूपुर, खेमपुर, जैतपुर, एतमादपुर, तुरकौली, दुल्लापुर, नगवा, कल्याणपुर, नवाबगंज गिर्द, जलालपुर, रौटिहा, परसपुर, सिरसा, शोभापुर, लौव्वावीरपुर, नकहरा, सेमरा शेखपुर, खरगुपुर, मौऊहारी, विश्वनोहरपुर, रघुनाथपुर, चौखडिया, दत्तनगर, साकीपुर, गोकुला, तुलसीपुर मांझा, पूरे अंबर, इंदपुर, होलापुर काली, चकशिवरहा, मीरपुर युसूफ, मखदूमपुर, निरवा, काजीपुर, खडौवा, रीवां, उमरिया, रेहली, कनकपुर, बालापुर, दुर्गागंज, बिसहिमपुर, मांझाराठ, महेशपुर, कटरा भोगचंद, वजीराबाद, दाईपुर, फतेहपुर, जफरापुर, इस्माइलपुर, निकरोजा, सराय हर्रा, लोलपुर, सरायनामू गांवों को इसमें शामिल किया जा रहा है।
अयोध्या से जुड़ने वाली नदियों के जीर्णोद्धार की मुहिम जारी
अयोध्या से जुड़ने वाली और रामायण काल की नदियों के जीर्णोद्वार की मुहिम जारी है। करीब 20 करोड़ की योजना से मनवर व टेढ़ी नदी के विकास का कार्य हो रहा है। टेढ़ी नदी तो नवाबगंज के पास सरयू में समाहित होती है और मनवर नदी तो सीधे बस्ती के मखौड़ा से जुड़ी। जिले के तिर्रेमनोरमा तट से निकल वह मखौड़ा में सरयू से मिलती है। मखौड़ी में ही अयोध्या के महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति का यज्ञ किया था। इससे मनवर नदी का अपना अलग ही महत्व है।
जिले के विकास में नदियों का जीर्णोद्धार कार्य काफी अहम है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में नदियों के जीर्णोद्धार की योजना है, जिसे जिले में लागू किया गया है। अभी मनवर व टेढ़ी नदी का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसके अलावा पर्यटन विकास के लिए तरबगंज के पराशर ऋषि के आश्रम स्थल की योजना भी स्वीकृत हुई है। कहा कि विकास के कार्य किए जा रहे हैं। -शशांक त्रिपाठी, सीडीओ