गोंडा। जीएसटी के नए स्लैब लागू होने से जहां आम आदमी महंगाई से राहत की उम्मीद में खुश है, वहीं व्यापारियों में असमंजस का माहौल बना हुआ है। रविवार को व्यापारियों की बैठक में जीएसटी को लेकर गुणा-गणित चलता रहा। आगामी पर्वों के लिए जिले के व्यापारी करीब 300 करोड़ रुपये के माल की खरीद जीएसटी के पुराने स्लैब के अनुसार कर चुके हैं। अब नए स्लैब से माल बेचने पर व्यापारियों को नुकसान का डर सता रहा है।
सोमवार से पूरे देश में जीएसटी के नए स्लैब लागू हो जाएंगे। कम की गई दरों वाले सामान को व्यापारियों को सस्ते दाम में बेचना होगा। जबकि अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार आगामी दुर्गा पूजा से लेकर दशहरा व दीपावली तक के लिए विभिन्न बाजारों में करीब 300 करोड़ रुपये के माल की खरीद की जा चुकी है। कपड़े, मिठाई, सजावट सामग्री, जूते, चप्पल, इलेक्ट्राॅनिक सामान, आभूषण, पूजन सामग्री आदि सामान से बाजार पट गए हैं। अब यदि व्यापारी अधिक जीएसटी दर पर खरीदा माल कम दर पर बेचते हैं तो आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) समायोजन में अंतर आएगा। इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इसकी कोई नियमावली अभी तक व्यापारियों को नहीं मिली है।
असमंजस में हैं व्यापारी
त्योहारों को लेकर व्यापारियों ने सामान की खरीद कर ली है। अभी तक उन्हें नए नियमों का कोई भी शासनादेश नहीं मिला है। जीएसटी से जुड़े अधिकारियों की ओर से भी कोई उचित जानकारी नहीं दी गई है। अब व्यापारियों में असमंजस है कि जीएसटी की पुरानी दर पर खरीदे गए माल को नई दर पर बेचने से होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति कैसे होगी।
भूपेंद्र आर्य, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल
नियम स्पष्ट करे सरकार
नई जीएसटी दर ग्राहक व दुकानदारों के लिए फायदेमंद है, लेकिन अभी तक कोई लिखित नियमावली न मिलने से छोटे व्यापारियों में उलझन की स्थिति है। जीएसटी के अधिकारियों से भी वार्ता की गई, लेकिन उचित जानकारी नहीं मिल सकी। सरकार उन व्यापारियों के लिए नियम स्पष्ट करे, जिन्होंने पुराने स्लैब पर माल खरीद लिया है।
अभिषेक गोयल, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल (कंछल गुट)
पुराना बिल प्रस्तुत करने पर रिटर्न होगा जीएसटी
नए स्लैब पर माल बेचने को लेकर व्यापारियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनकी ओर से 21 सितंबर से पहले का बिल प्रस्तुत कर रिटर्न फाइल करने पर घटी हुई दर से जो अंतर होगा, वह रकम वापस मिल जाएगी।
ज्ञानेंद्र सिंह, चार्टर्ड अकाउंटेंट