गोंडा के इंडियन ऑयल डिपो के गेट पर जमीन पर बैठे कर्मी। -संवाद
गोंडा। इंडियन ऑयल डिपो के अचानक बंद होने से गोंडा-बहराइच मार्ग पर रोजी-रोटी कमाने वाले तमाम परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। शनिवार को डिपो में पूरा काम बंद रहा। ऐसे में 173 नेपाली मजदूरों सहित करीब पांच हजार लोगों के रोजगार पर ताला लगने जैसा माहौल रहा। इंडियन ऑयल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश कुमार ने कर्मचारियों को सोमवार से लखनऊ के अमौसी स्थित डिपो में रिपोर्ट करने को कहा है।
डिपो के कर्मचारी सोनू सिंह ने कहा कि गोंडा जिले के लिए यह डिपो सिर्फ ईंधन वितरण का केंद्र नहीं था, बल्कि हजारों परिवारों का सहारा भी था। लोडिंग-अनलोडिंग, परिवहन, सुरक्षा, साफ-सफाई और आसपास की दुकानों का पूरा कारोबार इसी डिपो पर निर्भर था। अचानक शिफ्टिंग के फैसले ने उन परिवारों को चिंता में डाल दिया है जो रोजमर्रा की मजदूरी से गुजारा करते हैं। दीपक कुमार सिंह ने बताया कि डिपो की स्थापना 1995 में तत्कालीन सांसद आनंद सिंह की पहल पर हुई थी। तब से यह स्थान स्थानीय रोजगार का बड़ा केंद्र बना रहा।
अब लखनऊ के अमौसी के पास नए डिपो के निर्माण के बाद इसे शिफ्ट करने की सूचना मिली है। नेपाल के काकारा डाकरे ने बताया कि यहां नेपाल से 173 गाड़ियां आती थीं। करीब 20 वर्ष से वह यहां से अपनी रोजीरोटी चला रहे थे। कर्मचारियों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के काम बंद करना और जगह बदलने का आदेश देना अनुचित है। वहीं, स्थानीय कारोबारी भी चिंतित हैं कि डिपो बंद होने से इलाके की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। पूजाराम ने बताया कि डिपो पर वैधता 31 दिसंबर 2026 लिखी है। बिना किसी पूर्व सूचना के शुक्रवार को डिपो शिफ्ट होने की जानकारी दी गई।
ट्रांसपोर्टर रहमतुल्लाह ने बताया कि क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश कुमार के साथ बैठक हुई, लेकिन उन्होंने भी स्पष्ट कहा कि मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद डिपो शिफ्ट हो रहा है। सोमवार से सभी लोग लखनऊ में रिपोर्ट करेंगे।