गोंडा। देवीपाटन मंडल के तीन जिलों में सड़क हादसों में मृत लोगों के परिजनों को विवेचना में खेल करके 2.60 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम दिलाया गया है। इस खेल में दलालों के माध्यम से बीमा अभिकर्ता और विवेचकों ने अपनी-अपनी हिस्सेदारी तय करके बीमा कंपनी को चूना लगा दिया। हालांकि, बीमा कंपनी की जांच में हादसों के जो साक्ष्य मिले, वो विवेचना में शामिल तथ्यों से भिन्न निकले। बीमा कंपनी ऐसे ही 12 अन्य मामलों की जांच करा रही है।
देवीपाटन परिक्षेत्र के आईजी अमित पाठक ने नामित बीमा संस्था के अधिकारी राजेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत पर एसआईटी गठित कर सड़क हादसों के कई मामलों की जांच कराई थी। एसआईटी की जांच में दोषी पाए गए श्रावस्ती के एक निरीक्षक व दो उपनिरीक्षक, बहराइच के आठ व गोंडा के दो उपनिरीक्षकों को निलंबित किया गया था। आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। बहराइच के नौ और गोंडा व श्रावस्ती की दो-दो विवेचनाओं में विवेचकों ने बीमा का लाभ दिलाने के लिए खुलकर खेल किया।
बीमा कंपनी के अधिकारी राजेंद्र प्रताप सिंह को स्थलीय जांच में जो तथ्य मिले, वो विवेचना में दिए गए साक्ष्यों से बिल्कुल अलग हैं। मसलन बहराइच के रामगांव थाना क्षेत्र में बाइक के कुत्ते से टकराने के कारण हादसा हुआ, लेकिन विवेचक ने बाइक से बाइक की टक्कर से हादसा दर्शा दिया। ऐसी ही 12 मामलों में गड़बड़ी मिली है।
बीमा कंपनी के अधिकारी राजेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि अभी 12 और ऐसे मामले हैं, जिनकी जांच चल रही है। स्थलीय सत्यापन किया जा रहा है, साक्ष्य संकलन की कार्रवाई चल रही है। जांच पूरी होने के बाद इसकी शिकायत आईजी से की जाएगी।
पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में
सड़क हादसों की विवेचना में विवेचकों ने खूब भ्रष्टाचार किया। कहीं बाइक को पिकअप बना दिया तो कहीं कुत्ता। यही नहीं जो वाहन चालक हादसे के दौरान मुंबई में था, उसे हादसे में मौत का आरोपी बना दिया। विवेचकों ने आरोपियों को बचाने के साथ ही जो दोषी नहीं थे उन्हें फंसाने से लेकर पीड़ित परिवार को बीमा कंपनी से लाभ दिलाने तक की जिम्मेदारी ले ली। विवेचना में खेल करते हुए चार्जशीट भी दाखिल कर दी। बड़ा सवाल ये है कि प्रत्येक विवेचना के पर्यवेक्षणीय अधिकारी संबंधित सर्किल के सीओ होते है। ऐसे में पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। फिलहाल, इस मामले में अधिकारी पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर चुप हैं।