गोंडा। जिले में नई मूल्यांकन दरें (सर्किल रेट) लागू होने से मकान बनाने के लिए जमीन खरीदना अब महंगा हो गया है। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने चारों तहसीलों की वर्तमान दरों में औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि की है। मंगलवार से नई दरें प्रभावी हो गई हैं। नई दरों की सूची सभी उपनिबंधक कार्यालयों में भेज दी गई है।
नगरीय क्षेत्रों में गैर कृषि भूमि की दरों में दो से छह हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की बढ़ोतरी हुई है। अयोध्या सीमा से सटे लोलपुर के अर्धनगरीय क्षेत्र में आवासीय सर्किल रेट 6,900 से बढ़कर 7,600 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया है। व्यावसायिक उपयोग भूमि की दर 13 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तय की गई है। इस क्षेत्र में कृषि भूमि का रेट भी 45 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।
नवाबगंज गिर्द क्षेत्र में व्यावसायिक भवनों के लिए दर 25 हजार से बढ़ाकर 27 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई है। जिला मुख्यालय पर डीएम आवास से लेकर पथवलिया गांव की सीमा तथा अंबेडकर चौराहे से कचहरी रेलवे स्टेशन तक सर्किल रेट में दो से पांच हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की वृद्धि हुई है। हारीपुर, बालपुर जाट और माधवपुर चकत्ता जैसे अर्धनगरीय इलाकों में भी सर्किल रेट बढ़ाया गया है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद तरबगंज तहसील के सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीनों की बिक्री तेजी से बढ़ी थी, किंतु अब उधर भी सामान्य स्थिति बन गई है। इसलिए उधर भी सामान्य वृद्धि ही की गई है। सर्वाधिक वृद्धि सदर तहसील क्षेत्र में की गई है। हालांकि जिले के दूरदराज क्षेत्र के अनेक गांव ऐसे भी हैं, जहां पिछले कुछ वर्षों में न के बराबर बैनामे हुए हैं। उन गांवों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। कृषि योग्य जमीनों को भी न्यूनतम वृद्धि के दायरे में रखा गया है।
औसतन 10 प्रतिशत की हुई वृद्धि
एआईजी (स्टांप) कृपाशंकर ने बताया कि आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों की खरीद महंगी हुई है। कृषि योग्य जमीनों की दरों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी हुई है। जिन गांवों में बीते एक साल के अंदर न के बराबर बैनामे हुए हैं, वहां की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। पूरे जिले में औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।