रुपईडीह (गोंडा)। परिषदीय विद्यालयों के विलय के चलते बढ़ी दूरी व अन्य असुविधाओं की वजह से बड़ी संख्या में बच्चे अनुपस्थित चल रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। अभिभावकों के मुताबिक विलय से सुविधा तो कम मिली, लेकिन परेशानी बढ़ गई है।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय दलितपुरवा को लगभग डेढ़ किमी दूर पूर्व माध्यमिक विद्यालय हरखापुर में विलय किया गया है। जहां पर अब बच्चों की संख्या 55 हो गई और दो अध्यापक हो गए। मगर दलितपुरवा के 29 बच्चों में से बृहस्पतिवार को एक भी बच्चा हरखापुर विद्यालय नहीं पहुंचा।
प्राथमिक विद्यालय दुबावल में 34 बच्चे व तीन अध्यापक थे। इस विद्यालय को डेढ़ किमी दूर कंपोजिट विद्यालय दलपतपुर में विलय किया गया। जहां 34 में से आठ-दस बच्चे ही पहुंच रहे हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कौड़िया में 27 बच्चे थे। एक अध्यापिका थीं। इस विद्यालय को बगल के प्राथमिक विद्यालय कौड़िया प्रथम में विलय कर दिया गया। प्राथमिक विद्यालय माथेडीह में 48 बच्चे और दो अध्यापक थे। इस विद्यालय को चार सौ मीटर दूर प्राथमिक विद्यालय चौरी परिहार में विलय कर दिया गया है।
अभिभावक बोले- पुनर्विचार करें अधिकारी
दुबावल के अभिभावक दुर्गेश कुमार दूबे, जीवन लाल शुक्ल, होली प्रसाद, विश्वनाथ दूबे, राधेश्याम, राजेश दूबे, रामतीरथ दूबे तथा दलित पुरवा के मनीष पासवान, रामश्री, राम शब्द, रामशेखर, अंकित व नीरज ने बताया कि विद्यालय गांव से लगभग डेढ़ किमी दूर है। यही नहीं, रास्ता खराब है। बारिश में कीचड़ के साथ पानी भर जाता है। सड़क के ऊपर पानी बहने लगता है। मन डरता है कि रास्ते में कोई घटना न हो जाए। इसीलिए अब बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि गांव में विद्यालय होने से बच्चों को आने-जाने में असुविधा नहीं होती थी। अब कंपोजिट विद्यालय दलपतपुर के सामने नहर होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को भेजने से डर रहे हैं।
सुविधा पर दिया गया ध्यान
जो विद्यालय विलय किए गए हैं, उनकी दूरी व सुविधा पर बहुत ध्यान दिया गया गया है। अभिभावकों व बच्चों को कोई समस्या न हो, इसके लिए प्रयास किया जाएगा।
मनीष कुमार सिंह, खंड शिक्षाधिकारी, रुपईडीह