कटरा बाजार/दुबहा बाजार। कौड़िया के पैड़ीबरा स्थित सम्मय माता मंदिर परिसर में आयोजित कथा में प्रवाचक राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान की कृपा होने पर ही सत्संग का सुखद अवसर मिलता है। उन्होंने बुधवार को कथा में प्रभु श्रीराम की बाल लीला का मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘राजा जी खजनवा दे द, रानी जी गहनवा दे द’ जैसे पारंपरिक सोहर की प्रस्तुति दी। इस पर श्रद्धालु झूम उठे।
राजन जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति से बड़ा उसका व्यक्तित्व होता है। असल में बड़ा आदमी वही है, जिसके आने से घर में दिवाली जैसा उत्साह महसूस होने लगे। उन्होंने बताया कि अपनी बुरी आदतों को सुधारना व सकारात्मक बदलाव लाना ही वास्तविक भजन है। जब इंसान के मन, कर्म और वचन से चतुराई का लोप हो जाता है, तभी जीवन सरल होता है और ईश्वर की प्राप्ति संभव होती है।
प्रवाचक ने शिक्षा में संस्कारों और विवेक के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि विद्यालयों में इसके लिए विशेष ध्यान देना चाहिए। बिना सत्संग के विवेक का जाग्रत होना कठिन है। अयोध्या में श्रीराम के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु का नाम सुनने मात्र से जीवन धन्य हो जाता है।
उन्होंने चारों भाइयों के गुणों की चर्चा करते हुए राम को आनंद, भरत को प्रेम, शत्रुघ्न को मौन और लक्ष्मण को सेवा का पर्याय बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत रखने का आह्वान किया।
इस मौके पर पूर्व सांसद दद्दन मिश्र, भाजपा जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी, भवानी भीख शुक्ल, राकेश पांडेय, राजेश तिवारी, मसूद आलम खां, राम भजन चौबे, महेश नारायण तिवारी, अंकित शुक्ल आदि मौजूद रहे।