गोंडा। फर्नीचर आपूर्तिकर्ता फर्म से सवा दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने और 30 लाख रुपये एडवांस के रूप में लेने के आरोप में फंसे बीएसए अतुल कुमार तिवारी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ से राहत नहीं मिल पाई है। बीएसए ने एफआईआर निरस्त करने की याचिका दायर की थी। बाद में उनके अधिवक्ता ने याचिका पर बल न दिए जाने की प्रार्थना की जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए, याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने बीएसए अतुल कुमार तिवारी की याचिका पर दिया।
मोतीगंज के ग्राम किनकी निवासी मनोज पांडेय हरियाणा के गुरुग्राम स्थित नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एमडी हैं। मनोज पांडेय की तहरीर पर न्यायालय के आदेश पर नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें मनोज ने आरोप लगाया था कि 564 उच्च प्राथमिक एवं संकुल विद्यालयों में फर्नीचर आपूर्ति के लिए हुए टेंडर में उनकी कंपनी को एल-1 घोषित किया गया था। करीब 15 से 16 करोड़ रुपये के इस कार्य में बीएसए अतुल कुमार तिवारी, जिला समन्वयक (जेम) प्रेमशंकर मिश्र और जिला समन्वयक (सिविल) विद्याभूषण मिश्र ने उनसे 15 प्रतिशत कमीशन (करीब 2.25 करोड़ रुपये) की मांग की थी। मनोज के अनुसार, चार जनवरी 2025 को उन्हें राजकीय हाउसिंग कॉलोनी स्थित बीएसए के आवास पर बुलाया गया, जहां उन्होंने 22 लाख रुपये बीएसए को और चार-चार लाख रुपये दोनों समन्वयकों को दिए। शेष रकम न देने पर उनका 50.38 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट वापस लेकर रद्द कर दिया गया। इसके बाद उनकी फर्म को दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
बीएसए ने कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में एफआईआर निरस्त करने की याचिका दाखिल की थी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान बीएसए के अधिवक्ता ने याचिका पर बल न दिए जाने की प्रार्थना की। इसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।