कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने लोकसभा से जुड़े अपने अनुभव और भविष्य की राजनीति को लेकर खुलकर बात की है।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, जिस लोकसभा से मुझे बेइज्जत होकर निकाला गया, उस लोकसभा में मैं एक बार जरूर जाऊंगा, अगर जिंदा रहा तो। मेरी जनता ने मुझे नहीं हराया है। जनता तय करेगी कि मैं कहां से चुनाव लड़ूंगा। कोशिश तो रहेगी कि अपनी ही पार्टी से जाऊं, लेकिन बाद की बाद में देखेंगे।
'सीनियर राजनेता होने के बावजूद मुझे न्योता नहीं दिया गया'
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, एक जनप्रतिनिधि और सीनियर राजनेता होने के बावजूद मुझे न्योता नहीं दिया गया। जब तक जिंदा हूं, इस बात का अफसोस रहेगा। दूसरी बार जब न्योता आया तो मैंने खुद हाथ जोड़कर मना कर दिया, क्योंकि मैं स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकता।
राम जन्मभूमि आंदोलन में जिनका कोई योगदान नहीं था, उन्हें बुलाया गया और असली कारसेवकों को नजरअंदाज किया गया। हीरो-हीरोइन बुला लिए गए, उनका क्या योगदान था? क्या मंदिर निर्माण में हमसे या विनय कटियार से ज्यादा योगदान था उनका? मैं अब तक रामलला दर्शन के लिए नहीं गया। अब जब जाऊंगा तो आम बनकर। लाइन में लगकर दर्शन करूंगा। पास और खास के सहारे नहीं जाऊंगा।
ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर कही थी ये बात
बृजभूषण शरण सिंह ने लखनऊ में हुई भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर कहा था, यदि किसी समाज के विधायक आपस में मिलते हैं, परिचय करते हैं, भोजन या चाय-पानी करते हैं और प्रदेश व देश की समस्याओं पर चर्चा करते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
ब्राह्मण समाज के विधायक यदि सामाजिक ताने-बाने, प्रदेश की स्थिति और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं तो इसे गलत ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी बैठकों में आपत्तिजनक क्या है, उन्हें इसमें कोई त्रुटि नजर नहीं आती। बृजभूषण ने उन्नाव दुष्कर्म कांड के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सेंगर के खिलाफ साजिश रची गई थी और उनके साथ अन्याय हुआ।