गोंडा। प्रधानमंत्री जनधन योजना से गोंडावासी ऐसे तनमन से जुड़े कि अपना जिला प्रदेश में अव्वल साबित हुआ। निजी कंपनियों में पैसा निवेश करने के बजाय इस बार प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत लोगों ने ताबड़तोड़ 44 लाख से अधिक बैंक खाते खुलवाए गए। इस तरह से 2,809 करोड़ की रकम जमा करने पर गोंडा को प्रदेश में पहला स्थान मिला है और जिले के पिछड़े होने का कलंक धुल गया। अब इसको बरकरार रखने के लिए डाक विभाग ने विशेष अभियान चलाने की तैयारी की है।
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले की आबादी करीब 37 लाख है। इसके सापेक्ष 44 लाख लोगों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खाते खुलवाए। इन खातों में 2809 करोड़ रुपये जमा हैं। यही नहीं, जीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या एक लाख 99 हजार है। ऐसे में जन-धन योजना को प्रभावी बनाने के लिए सरकारी तंत्र ने एक और पहल शुरू की है। इसके तहत जागरूकता को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं।
इन स्रोतों से बढ़ा निवेश
बैंककर्मियों के मुताबिक गन्ने की फसल का पैसा हो या फिर अन्य निवेश की रकम, इस बार लोगों ने निजी कंपनियों में निवेश के बजाय उसे बचत खाते में जमा किया। वहीं, 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण पर मुआवजे में मिली रकम को भी किसानों ने इसी खाते में जमा किया। साथ ही किसान सम्मान निधि ने भी इसमें काफी इजाफा किया है।
रंग लाई यह मुहिम
लीड बैंक मैनेजर अभिषेक रघुवंशी बताते हैं कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना में खाते खुलवाने का यह लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए तीन स्तरीय प्रक्रिया पर काम किया गया। पहला, लोगों से संवाद करके उन्हें बैंकिंग नियमों के प्रति जागरूक किया गया। इसके बाद ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से शिविर का आयोजन किया गया। साथ ही आम लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी की प्रभावी पहल की गई, और इन सबका नतीजा सार्थक रहा।
गांव-गांव डाककर्मियों ने जगाई अलख
गोंडा मंडल की डाक अधीक्षक किरन सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री जनधन योजना को धरातल पर उतारने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए गए। गांव-गांव डाककर्मियों ने लोगों को जागरूक किया। इसके कारण लोगों में विश्वास जगा। साथ ही लोगों ने खाते खुलवाकर निवेश किया। अब एक बार फिर जल्द ही अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके माध्यम से सुरक्षा के साथ बचत भी स्लोगन को लेकर खाता खुलवाने पर फोकस किया जाएगा।