गोंडा। राशन कार्डों में फर्जी यूनिट दर्ज करके राशन में कालाबाजारी का मामला सामने आया है। खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से ही कराए गए सत्यापन में ग्रामीण क्षेत्रों में 5538 यूनिट और नगरीय क्षेत्रों में 132 यूनिट फर्जी दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद इन यूनिट को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि एक यूनिट पर पांच किलो राशन सरकार की ओर से मिलता है। ऐसे में हर महीने 28 कुंतल राशन की हेराफेरी होती है। साल भर में करीब 70 लाख के राशन की कालाबाजारी फर्जी यूनिट के सहारे किए जाने का अनुमान है। जिला पूर्ति अधिकारी वीके महान कहते हैं डुप्लीकेट यूनिट सत्यापन से चिन्हित किया गया है। अब पहले से काफी सुधार है जो डुप्लीकेट यूनिट सामने आया है उसे निरस्त किया जा रहा है।
जिले में गरीबों के राशन में घपला थम नहीं रहा है। फर्जी यूनिट के सहारे जिले में हर साल 70 लाख रुपये के राशन की घपलेबाजी सिर्फ फर्जी यूनिट से किए जाने की बात सामने आने से खलबली मची है। इसका खुलासा सरकारी स्तर पर हुए सत्यापन से हुआ है। 5538 यूनिट फर्जी दर्ज कराकर हर महीने राशन की घपलेबाजी होती है।
अब फर्जी यूनिट रद्द करने की कार्रवाई विभाग ने शुरू की है। इसके अलावा ऐसे कोटेदार भी चिन्हित किए जा रहे हैं जिन्होंने फर्जी यूनिट का राशन खारिज किया है। जिले में 5 लाख 63 हजार 469 राशन कार्डों में 24 लाख 68 हजार 656 यूनिट दर्ज है। प्रत्येक यूनिट पर पांच किलोग्राम राशन का आवंटन, उठान व वितरण किया जाता है।
जांच में खुलासा हुआ कि 5538 यूनिट फर्जी हैं और इनके नाम पर करीब 275 क्विंटल खाद्यान्न हर माह उठता है और उसका वितरण न करके घपलेबाज बाजार में बेच डालते हैं।
इस तरह एक साल में करीब 3500 क्विंटल खाद्यान्न कालाबाजारी की भेंट चढ़ जाता है। बाजार दर पर इसकी कीमत 70 लाख से अधिक है। कई सालों से चल रहे यूनिट के आधार पर राशन वितरण के कार्य में डुप्लीकेट यूनिट का भी आवंटन और वितरण होने की बात सामने आई है।
अब विभाग मामले में डुप्लीकेट यूनिट निरस्त कराकर वितरण में सुधार करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल राशन वितरण में कई तरह की पेच हैं जिससे कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हर साल 70 लाख के राशन कहां जा रहा है यह अभी विभाग स्पष्ट नही कर पा रहा है। फिलहाल वितरण में सुधार के लिए तकनीक के इस्तेमाल का दावा विभाग कर रहा है।
राशन वितरण के लिए खाद्यान्न उठान से शुरू होता है खेल
कोटे की दुकानों के माध्यम से गरीबों को राशन वितरण में खेल खाद्यान्न उठान से शुरू होता है। कोटेदारों की शिकायतें रहती हैं कि उन्हें वितरण के लिए राशन वजन करके नहीं दिया जाता है। हर बोरे में 5 से 7 किलो राशन कम रहता है। इसमें सुधार के लिए शासन ने जांच करने और कड़ा रुख अपनाने के निर्देश दिए थे।
जिला पूर्ति अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि राशन देते समय वजन कम न होने पाए। इसके बावजूद कई कोटेदार राशन कम मिलने की बात विभाग के अधिकारियों से कह चुके हैं। इसमें सुधार नहीं हो पाता है, इससे गोदामों से ही गड़बड़ी शुरू होती है और इसका असर वितरण तक होता है।
सीबीआई भी कर रही है खाद्यान्न घोटाले की जांच
जिला खाद्यान्न घपले के लिए कई वर्षों से चर्चित है। वर्ष 2004 में खाद्यान्न घोटाले की जांच वर्ष 2008 से सीबीआई कर रही है। अभी भी जांच की जा रही है बीते दिनों सीबीआई की टीम जिले में आई थी और जांच की थी। इसमें राशन वितरण में घपले के हर पहलु की जांच हो रही है।
इसके अलावा बीते वर्ष 2018 में हुए खाद्यान्न घोटाले की जांच अब सीबीसीआईडी कर रही है। बयान के लिए कई अधिकारियों को तलब किया जा चुका है। इन सबके साथ ही करीब 56 कोटेदारों के विरुद्ध विभाग ने कार्रवाई भी की है। इसके बावजूद राशन वितरण में घपले नही रुक रहे हैं। इसमें कई बड़े भी हाथ धो रहे हैं।
डुप्लीकेट यूनिट को हटाने का काम शुरू
राशन कार्डों में डुप्लीकेट यूनिट की जांच की गई है। अब काफी सुधार हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्र के राशन कार्डों में 5538 और शहरी क्षेत्र में 132 डुप्लीकेट यूनिट 28 अक्तूबर की जांच में दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई है। जिन्हें हटाया जा रहा है।
- वीके महान, डीएसओ