शासकीय और अनुदानित महाविद्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था लागू होने से शिक्षक-कर्मचारियों की उपस्थिति सुधर गई। मगर उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए ये व्यवस्था लागू नहीं की जा सकी है। इसके लिए कॉलेज के जिम्मेदार कन्नी काट रहे हैं। आलम यह है कि बायोमीट्रिक की अनिवार्यता के बाद शिक्षक व कर्मचारियों की उपस्थिति देखकर वेतन भुगतान किया जा रहा है। मगर कक्षाओं में 75 प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय से लागू व्यवस्था कागजों में ही सिमटकर रह गई है।
जुलाई 2023 में राज्यपाल की अध्यक्षता में बैठक के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी शासकीय व अनुदानित महाविद्यालयों में प्राचार्य, शिक्षक, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी थी। जिसके आधार पर शिक्षकों काे वेतन भुगतान, विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप और परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जानी थी। महाविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए तो बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था कर दी गई मगर विद्यार्थियों के लिए ये व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।
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अधिकारियों ने बताया कि भवनिया कला राजकीय महाविद्यालय के अलावा शहर में एलबीएस पीजी कॉलेज, बभनान में किसान डिग्री कॉलेज के साथ ही दो अनुदानित कॉलेज हैं। इनमें लगभग 15 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। मगर किसी भी महाविद्यालय में बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू नहीं की जा सकी।
शिक्षक संघ अध्यक्ष व हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शैलेंद्रनाथ मिश्र का कहना है कि बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू होने से शिक्षक व कर्मचारियों की उपस्थिति में काफी सुधार आया है। तय समय पर सभी शिक्षक व कर्मचारी महाविद्यालय में हाजिरी दे रहे हैं। छात्रों की भी उपस्थिति सुनिश्चित होने से शिक्षकों के पास कोई बहाना नहीं रहेगा। वहीं, महाविद्यालय की अपनी अलग पहचान बनेगी।
दरअसल, यह व्यवस्था शासकीय व अनुदानित कॉलेजों में ही लागू की गई थी। वहीं, जिले के निजी महाविद्यालयों में बड़े पैमाने पर महज प्रवेश व परीक्षा का ही खेल चल रहा है। आशंका है कि बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था लागू होने से शासकीय व अनुदानित महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या कम हो जाएगी। सिर्फ नियमित क्लास लेने व पढ़ने वाले बच्चे ही प्रवेश लेंगे।
एलबीएस पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. रवींद्र कुमार का कहना है कि महाविद्यालय के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि सभी 8400 विद्यार्थियों के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम लगाया जा सके। सरकार को लगता है कि महाविद्यालय में विद्यार्थी अपेक्षाकृत कम आ रहे हैं। संसाधन मुहैया कराने पर ही व्यवस्था लागू होगी। उक्त आदेश जारी होने के पहले से मैं और सभी शिक्षक व कर्मचारी बायोमीट्रिक हाजिरी दर्ज करा रहे हैं।
देवीपाटन मंडल के उच्च शिक्षाधिकारी डॉ. सुधीर चौहान का कहना है कि फिलहाल किसी भी महाविद्यालय में छात्रों की उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम की व्यवस्था नहीं हो पाई है। जबकि महाविद्यालयों में शिक्षकों व कर्मचारियों से लेकर छात्रों तक की बायोमीट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य की गई है। सरकार की मंशा है कि महाविद्यालयों में ये व्यवस्था लागू हो। इससे राजकीय व अनुदानित कॉलेजों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा।