गोंडा। राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण के खिलाफ शुक्रवार को दूसरे दिन भी बैँककर्मियों की हड़ताल जारी रही। अधिकांश बैंकों के बाहर ताले लटके रहे। जिससे जिले के सभी बैंक शाखाओं के 150 करोड़ के चेक क्लीयरिंग के सहित 200 करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा। बैंक कर्मियों ने रोडवेज बस स्टॉप स्थित इंडियन बैंक की मुख्य शाखा के सामने इकट्ठा होकर संसद में प्रस्तावित बिल का विरोध किया। उन्होंने बैंक के निजीकरण को देश के लिए भी नुकसान बताया।
कहा कि इससे जनता की जमा पूंजी खतरे में पड़ सकती है। सभा को संबोधित बैंक इम्प्लाई यूनियन के जिलाध्यक्ष सलीम अहमद ने सरकार के बैँक निजीकरण नीति को आम जन विरोधी बताया। वहीं यूनियन के सचिव विपुल गुप्ता ने कहा कि बैंकों के निजीकरण का फैसला सरकार को वापस लेना चाहिए। सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि सरकार के जनविरोधी नीति का विरोध किया जा रहा है। अगर निजीकरण का फैसला नहीं वापस लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संसद में बैंकों के निजीकरण को लेकर पेश होने वाले बिल का विरोध किया जा रहा है। इसे लेकर बैंक की वार्ता असफल रही है। ऐसे में बैंकों के पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताल से ग्राहकों को परेशानी हो सकती है, लेकिन यह परेशानी अल्पकालिक है।
अगर राष्ट्रीकृत बैंक निजी हाथों में चले गए तो ग्राहकों को सबसे अधिक दिक्कत आएगी। उन्होंने लोगों से भी सहयोग की अपील की है। इस प्रदर्शन में राकेश कुमार, विजय कुमार, शिवकुमार, उदय कुमार, सुरेश, नायाब सिंह, महेश पांडेय आदि उपस्थित रहे।
एटीएम खाली, ऑनलाइन बैंकिंग से राहत
दूसरे दिन भी बैंक की हड़ताल होने से बैंकों में जाकर लेनदेन करने वाले लोग सबसे अधिक परेशान हुए। एटीएम खाली हो गए। वहीं ऑनलाइन बैंकिंग से थोड़ी राहत मिली। कुछ बैंक के मोबाइल एप सर्वर डाउन होने से नहीं चले। बड़गांव पुलिस चौकी के पास, एलबीएस चौराहा, आंबेडकर चौराहा पर लगे अधिकांश एटीएम कैशलेस हो गए। जिससे लोगों को एक एटीएम से दूसरे एटीएम तक भटकना पड़ा।