गोंडा। चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सीएमओ कार्यालय के लेखा लिपिक का जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अभिनव चतुर्वेदी के मुताबिक शिकायतकर्ता आशीष पांडेय ने गोंडा स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम थाना में प्रार्थना पत्र दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता अंगद पांडेय मुख्य चिकित्सा अधिकारी गोंडा कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारी के पद से वर्ष 2014 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके किडनी में संक्रमण है और लखनऊ में इलाज चल रहा है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति का 51 हजार 102 रुपये का बिल सीएमओ कार्यालय में प्रस्तुत किया गया है।
आठ दिसंबर को भुगतान का अनुरोध करने पर लेखा लिपिक शशिकांत सिंह द्वारा पांच हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा है कि रुपये न देने पर भुगतान नही हो पाएगा। इस पर कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन टीम ने नौ दिसंबर 2025 को सीएमओ कार्यालय परिसर में शशिकांत सिंह को पांच हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद शशिकांत को एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। लेखा लिपिक ने जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान मुकदमे के तथ्य, साक्ष्य, अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए प्रभारी विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दानिश हसनैन ने अभियुक्त शशिकांत सिंह का जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।