प्रसव से पीड़ित एक महिला के बच्चे को पेट में उल्टा होने की बात कहकर स्टाफ ने उसे गोंडा महिला अस्पताल रेफर कर दिया। महिला गेट तक ही पहुंची थी कि डिलीवरी हो गई। वहीं, एक महिला को बच्चा पैदा होने के बाद तब तक भर्ती नहीं किया गया, जब तक उसने 500 रुपये की घूस के एवज में 250 रुपये नहीं दे दिए।
नतीजा प्रसव के दर्द से कराहती दोनों महिलाओं को फर्श पर बच्चे को जन्म देना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग में मानवीय संवेदनाएं तार-तार हो रही हैं। डिलीवरी से लेकर बच्चा पैदा तक उनसे फुटकर में कभी 500 तो कभी 1000 रुपये तक की वसूली होती है।
बुधवार को सीएचसी तरबगंज में नेवाजपुरवा रामापुर से आई दिनेश की 37 वर्षीय पत्नी प्रसव पीड़ा से कराहते हुए जब अस्पताल पहुंची, तो उन्हें वहां भर्ती किए जाने के बजाए पेट में बच्चा उल्टा होने की बात कहकर जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
दिनेश पत्नी को लेकर जैसे ही अस्पताल के गेट के बाहर निकले कि तभी प्रसव पीड़ा इतनी बढ़ी कि पत्नी ने वहीं बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद महिला को सीएचसी में भर्ती किया गया। इस घटना के कुछ समय बीतते ही जमालखानी गांव निवासी सत्यप्रकाश पत्नी प्रमिला (25) को प्रसव पीड़ा पर सीएचसी लेकर गए।
वहां प्रमिला से 500 रुपये मांगे गए। उसे भर्ती नहीं किया गया। दर्द से कराहती प्रमिला ने फर्श पर ही बच्चे को जन्म नहीं दे दिया। बाद में सीएचसी स्टाफ ने उससे 250 रुपये लेकर भर्ती किया।
एनएचएम में प्रसव पीड़ित महिलाओं को डिलीवरी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 रुपये तो शहरी क्षेत्रों में एक हजार रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
लेकिन सीएचसी-पीएचसी पर प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं से इसी चेक को लेकर सौदा किया जाता है। जब कोई महिला व उसके परिवारीजन पैसा देने से इंकार कर देते हैं तो उन्हें जेएसवाई की चेक न दिए जाने की धमकी दी जाती है।