बेलसर में महिलाओं को जागरूक करतीं बबिता सिंह। स्रोत: स्वास्थ्य विभाग
- फोटो : कटान की चपेट में कंपोजिट स्कूल।
गोंडा। देश सेवा का जज्बा लिए सेना में भर्ती की तैयारी कर रही बबिता सिंह के कदमों को फाइलेरिया नामक बीमारी ने रोक दिया। मात्र 20 साल की आयु में बीमारी ने उनके सपनों को तोड़ दिया। मनरेगा में सोशल ऑडीटर बबिता अपनी आपबीती सुनाकर अन्य महिलाओं को फाइलेरिया से बचाव के तरीके बता रही हैं।
बेलसर विकासखंड के भमैचा निवासी बबिता सिंह ने बताया कि उन्होंने दो विषयों से एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की है। बचपन से सपना था कि सेना में जाकर देश की सेवा करेंगी। लेकिन 20 वर्ष की आयु में ही उन्हें पैरों में सूजन व दर्द की समस्या होने लगी। जांच कराने पर फाइलेरिया की पुष्टि हुई। इलाज में लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद कोई आराम नहीं मिला। सरकारी अस्पताल से दवा व किट के सहारे बीमारी के प्रभाव को कम करते हुए अपनी जिंदगी जी रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस समय मनरेगा में सोशल ऑडिटर के पद पर तैनात हैं। गांव में ऑडिट करने जाते समय एक विशेष जागरूकता शिविर भी लगाती हैं। जिनमें महिलाओं को फाइलेरिया के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अब तक 600 महिलाओं को जागरूक कर चुकी है। उनकी पहल पर सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा व एसीएमओ डॉ. सीके वर्मा ने उन्हें सम्मानित भी किया है।