गोंडा में सूर्य ग्रहण के मौके पर समय-समय पर बदलते हुए सूर्य का आकार। छाया- रोहित तिवारी
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गोंडा। रविवार को सूर्य ग्रहण पर सुबह 9 बजे से दोपहर तीन बजे तक खगोलीय घटना का दीदार किया, वहीं धार्मिक मान्यता के आधार पर तीन बजे के बाद लोगों ने स्नान, ध्यान करके पूजन-अर्चन किया। विज्ञान संचारक राजेश मिश्र ने कहा कि सूर्य ग्रहण के दौरान रोचक खगोलीय घटना को बाइस्कोप से देखा। सूर्य चंद्राकार होते हुए फिर अपने स्वरूप में लौटा। उन्होंने कहा कि यह बहुत अहम घटना है और विज्ञान के छात्रों के लिए इसके हर पहलु की जानकारी मिलनी चाहिए। वहीं विज्ञान क्लब की डॉ. रेखा शर्मा ने वैज्ञानिकता के आधार पर सूर्य ग्रहण का अध्ययन किया। इसके अलावा आम लोगों ने धार्मिक मान्यता के आधार पर संयम बरता और दोपहर बाद ही स्नान ध्यान किया।
रविवार को सूर्य ग्रहण की घटना से विज्ञान व धर्म का संगत होते दिखा।
विज्ञान के जानकारों से इस खगोलीय घटना को एक अध्ययन के रूप में लिया और सावधानी के साथ ही हो रहे बदलावों को देखा। वहीं धार्मिक मान्यता वालों ने साल के पहले सूर्य ग्रहण को काफी गंभीरता से लिया। सूर्य ग्रहण खत्म होते ही स्नान किया और घरों में गंगा जल का छिड़काव किया। तुलसी पौधे की पूजा किया और देवी देवताओं की मूर्तियों को भी स्नान कराया। इसके बाद ही लोगों ने भोजन किया। पंडित दुर्गा प्रसाद ने बताया कि पितृदोष की मुक्ति के लिए सूर्य ग्रहण के बाद लोगों ने भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक किया है।
सूर्य ग्रहण पर आस्था के आगे टूटी सोशल डिस्टेंसिंग
करनैलगंज (गोंडा)। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा कर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में स्नान किया। रविवार को सूर्य ग्रहण के बाद करनैलगंज के सरयू तट स्थित कटरा घाट पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लग गया। करीब 25 हजार से अधिक की संख्या में श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में स्नान दान करने के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। सूर्य ग्रहण लगने के बाद क्षेत्र की सड़कों पर जबरदस्त सन्नाटा हो गया और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का हुजूम करनैलगंज के सरयू तट कटरा घाट पर पहुंचा। जहां लोग भजन कीर्तन करते रहे। लगभग 2 बजे सूर्य ग्रहण की समाप्ति होने के बाद मां सरयू के जय घोष के साथ श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया।
लोगों ने ग्रहण समाप्ति के बाद आस्था की डुबकी सरयू नदी में लगाई और घाट पर मौजूद ब्राह्मण या पंडो को दान दक्षिणा देने के बाद मंदिर में दर्शन किया। यह स्नान शाम तक चलता रहा। दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु लगातार आते रहे और सरयू नदी में स्नान करते रहे। करीब 25 हजार से अधिक लोगों ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। मगर प्रशासन या पुलिस द्वारा स्नान के मौके पर घाट पर कोई भी व्यवस्था नहीं की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे थी। लोग आस्था के आगे सोशल डिस्टेंसिंग को भी भूल गए और एक ही घाट पर हजारों की संख्या में लोगों का जमावड़ा रहा।