गोंडा। मंडल के किसानों को किराए पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की योजना में बड़े पैमाने पर गोलमाल सामने आया है। दो साल पहले 33 समितियों को दो करोड़ 64 लाख की सब्सिडी बांटने में खेल हुआ है। इस मामले का खुलासा कटरा बाजार ब्लॉक के बरूई गोंदहा गांव की समिति को दिए गए 8 लाख की सब्सिडी की जन सूचना से जानकारी मांगने पर हुआ है। समिति के अध्यक्ष के पास जमीन ही नहीं है और एक सदस्य का निधन समिति के गठन के 12 वर्ष पहले ही हो चुका है। इसकी जानकारी होने पर उपनिदेशक कृषि ने मृतक को समिति से हटाने का दावा किया है। लेकिन ऐसे ही उन समितियों को सब्सिडी दे दी गई है जो किसानों को यंत्र की उपलब्ध नहीं करा रही हैं। इससे किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
किसानों को सरकारी सहायता देकर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाने वाली मशीनरी बैंक योजना में चहेती समिति का चयन कर उसे 8 लाख की सब्सिडी देने का फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि जिस समिति का चयन किया गया था उसके अध्यक्ष के पास जमीन ही नहीं थी। इसके अलावा समिति में एक ऐसे व्यक्ति को सदस्य बनाकर शामिल कर लिया गया जिसकी मृत्यु समिति रजिस्ट्रेशन से 12 वर्ष पहले ही हो चुकी थी। शिकायतकर्ता ने जन सूचना अधिकार के जरिए समिति चयन की सूचना मांगी तो अब इसका खुलासा हुआ। कृषि विभाग की तरफ से वर्ष 2016-17 मंडल की 33 समितियों को फार्म मशीनरी बैंक योजना के तहत 2.64 करोड़ रुपये की सब्सिडी बांटी गई थी।
योजना के तहत उन्हीं समितियों का चयन किया जाना था, जिसके अध्यक्ष के पास खुद की या फिर लीज पर ली गयी जमीन हो और वह खेती करता हो। मानकों की अनदेखी कर अफसरों ने अपनी चहेती समितियों का चयन कर लिया और बगैर जांच पड़ताल के उन्हें सब्सिडी के आठ-आठ लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जिले के बड़गांव क्षेत्र के रहने वाले समाजसेवी कौशल कुमार ने जब इस संबंध में सूचना मांगी तो पता चला कि कटरा बाजार के बरुई गोंदहा की जिस भवानीशंकर कृषि विकास समिति का चयन कर उसे 8 लाख की सब्सिडी दी गई है उसके अध्यक्ष के पास जमीन ही नहीं है। इसके अलावा समिति ने सदस्य के रूप मे शामिल भवानीशंकर की मृत्यु वर्ष 2004 में ही हो चुकी है। फर्जीवाड़ा कर सब्सिडी लेने के इस फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मचा है।
योजना के चयन में समिति का नहीं किया गया सत्यापन
कृषि विभाग की ओर से गांवों में किसानों के लिए एक ही स्थान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की योजना में आवेदन का सत्यापन नहीं हुआ। आरोप है कि ऑफिस में ही बैठकर सब्सिडी भेजने की बात तय हो गई और समितियों को सब्सिडी भेज दिया गया। समिति में शामिल सदस्यों के बारे में भी गहराई से जांच नही हुई, सब्सिडी दिलाने में निजी यंत्र विक्रेताओं की भूमिका अहम रहती है। ऐसे में विभाग की चूक से समिति की जांच नही हो पाई।
किसानों को नहीं मिल पा रहा फार्म मिशनरी बैंक का लाभ
कृषि फार्म मिशनरी बैंक का फायदा किसानों को मिलना चाहिए और उनको खेती के लिए यंत्रों की सुविधा इसी बैंक से मिलनी चाहिए। लेकिन किसानों की मानें तो समितियों की ओर किसानों को लाभ नहीं दिया जाता है। यंत्र को वह अपना मानकर उपयोग करते हैं और कोई मांग भी करता है तो उसे अधिक मूल्य देना पड़ता है। कागजों में ही समितियां आपस में अपने परिचितों की सूची बना लेती हैं। इसकी भी जांच कई सालों से नही किया गया है।
किसानों के लिए फार्म मिशनरी बैंक की स्थापना हुई है, जो भी अनुदान दिया गया है पूरी छानबीन करके दी गई है। बरूई गोंदहा की समिति में शामिल लोगों के बारे में जानकारी की गई है। जिसकी मृत्यु हुई है वह समिति से बाहर हो जाएगा। फार्म मिशनरी बैंक की उपयोगिता के बारे में रिपोर्ट ले ली जाएगी।
- डॉ. मुकुल तिवारी, उपनिदेशक कृषि देवीपाटन मंडल