बाढ़ से बचाव को लेकर शासन ने अभी से ही प्रबंध करने का निर्देश दिया है, लेकिन यहां सिस्टम की लापरवाही सब पर भारी पड़ रही है। बचाव के लिए स्वीकृत 20 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाएं अभी धरातल पर ही नहीं उतर पाई हैं। इन परियोजनाओं की प्रक्रिया टेंडर में उलझी हुई है। काम की रफ्तार यही रही तो इस बार फिर बाढ़ तबाही मचाएगी मचाएगी और जिम्मेदार देखते रहेंगे।
सात करोड़ से बने एल्गिन चरसड़ी बांध की मरम्मत पर बीते 18 वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। मगर बाढ़ का खतरा कम नहीं हो सका है। वर्ष 2024 में बाढ़ से निपटने के लिए पहले ही करीब छह करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हुआ, जिसमें तीन स्परों का एक साथ निर्माण कराया गया। इसपर करीब सवा दो करोड़ रुपये खर्च हुए। बाकी रुपये बांध मरम्मत व स्पर, ठोकर के निर्माण पर खर्च किए गए। इसके बावजूद बाढ़ के सम बहुवन मदार मांझा के पास जब नदी कटान करने लगी तो पत्थर, नदी को बैरिकेट करने, बांस, बल्ली लगाने में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। कुछ यही हाल वर्ष 2023 का भी था। तब 4.7 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
जहां कटान वहां काम, बाकी बांध को कौन पूछता है
एल्गिन चरसड़ी बांध की मरम्मत में रुपयों की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। बांध की हालत जस की तस बनी हुई है। बांध में जहां एक बार कटान शुरू हुई, वहां पर सिंचाई विभाग व बाढ़ खंड के अधिकारी काम कराते हैं। बाकी बांध जस की तस स्थिति में पड़ा है।
यहां होना है काम
इस वर्ष 20 करोड़ रुपये से एल्गिन चरसड़ी तथा सकरौर भिखारीपुर बांध के बचाव का कार्य होना है। करनैलगंज के बहुवन मदार मांझा के पास तीन स्पर और ठोकर बनाने का कार्य प्रस्तावित है। सहायक अभियंता बाढ़ खंड अमरेश सिंह का कहना है कि इस वर्ष तीन परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है, जिनका टेंडर हो रहा है। जिले को बाढ़ से बचाने वाले दो बांधों पर कार्य होगा। तैयारी समय से पूरी कर ली जाएगी।