गोंडा। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में फर्जी नियुक्ति कराने वाले मास्टर माइंड समेत तीन आरोपियों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को जेल भेजने का आदेश दिया। एसटीएफ ने सोमवार को मास्टर माइंड पुष्पेंद्र उर्फ राज के साथ ही फर्जीवाड़े में शामिल बेसिक शिक्षा विभाग के जौनपुर के जिला समन्वयक आनंद सिंह व हरदोई में बीएसए के प्रधान लिपिक रामनाथ को गिरफ्तार कर गोंडा पुलिस के हवाले किया था।
गोंडा की अनामिका शुक्ला के नाम से प्रदेश के नौ जनपदों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में दूसरी महिलाओं को नौकरी दिलाई गई थी। इसके बाद अनामिका शुक्ला चर्चा में आई और अमर उजाला की छानबीन से असली अनामिका शुक्ला का पता चला। खबर पढ़कर नौ जून को अनामिका शुक्ला ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को अपने दस्तावेज सौंपे। अनामिका ने बताया कि उन्होंने पांच जिलों में वर्ष 2017 में आवेदन तो किया था लेकिन काउंसलिंग नही कराई। 11 जून को अनामिका ने इस मामले में नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। एसटीएफ ने पूरे मामले की जांच करके अनामिका के नाम से हुए फर्जीवाड़े का खुलासा कर दिया।
यही नहीं सोमवार को लखनऊ में एसटीएफ ने फर्जीवाड़े के मुख्य सरगना पुष्पेंद्र उर्फ राज निवासी मैनपुरी को गिरफ्तार करने के साथ ही जौनपुर बीएसए के दफ्तर के उस जिला समन्वयक आनंद को गिरफ्तार किया। जिसने अनामिका शुक्ला के दस्तावेज हरदोई के प्रधान लिपिक रामनाथ को सौंपे थे। जांच में यह भी सामने आया कि अनामिका के साथ ही जौनपुर की प्रीति यादव के दस्तावेज भी दिए गये थे। इन दस्तावेजों के आधार पर प्रदेश में 11 फर्जी नियुक्तियां सरगना ने कराईं। मामले की एफआईआर अनामिका ने गोंडा में दर्ज कराई थी इसलिए एसटीएफ ने तीनों को गोंडा पुलिस के हवाले कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपितों को कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।
एसटीएफ ने अनामिका प्रकरण के मुख्य सरगना के साथ बेसिक शिक्षा के दो कर्मियों को पुलिस के हवाले किया। जिला अस्पताल में चिकित्सीय परीक्षण कराने गये तीनों आरोपितों ने एक दूसरे से बातचीत नही की। मास्टर माइंड पुष्पेंद्र उर्फ सुशील उर्फ राज ने मीडिया से कहा कि वह कोई नौकरी नहीं देता था और अन्य दोनों को वह पहचानता तक नहीं है। यही नहीं जौनपुर का समन्वयक आनंद सहमा दिखा और पूरे मामले से पल्ला झाड़ते नजर आया। कहा कि उसे फंसाया जा रहा है। उसने एक पुलिस कर्मी का नाम भी लिया। हरदोई के प्रधान लिपिक रामनाथ भी सहमा-सहमा नजर आया।
इससे पहले पुलिस मास्टर माइंड समेत तीनों आरोपितों को लेकर आधी रात के बाद गोंडा पहुंची। सुबह तक तीनों नगर कोतवाली में रहे और सुबह नहाने के बाद अस्पताल ले जाए गये। वहां से दोपहर बाद कोर्ट भेजे गये। तीनों जालसाजों ने यह दिखाने की पूरी कोशिश किया कि वह एक दूसरे को नही जानते हैं। रात में भी एक-दूसरे बात नही की और सुबह तो एक-दूसरे को पहचानने से ही इनकार करते रहे।
एसटीएफ ने अनामिका प्रकरण का खुलासा करके तीनों आरोपितों को सौंप दिया है, जिन्हें न्यायालय में पेश किया गया और वहां से जेल भेज दिया गया।
लक्ष्मीकांत गौतम, सीओ सिटी