जबरन साइबर अपराध कराती थी चीन की कंपनी
मनकापुर (गोंडा)।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मेझरिया पटीठ निवासी रामबान सिंह उर्फ राजन ने बताया कि उनका छोटा भाई अभिमन्यु सिंह ऑनलाइन चैटिंग में किसी एजेंट के संपर्क में आया। डाटा एंट्री कार्य के लिए उसे ऑफर दिया गया। 75 हजार रुपये के पैकेज पर बात तय हुई। इसके बाद 28 जनवरी को अभिमन्यु बैंकॉक गया। साथ में बिहार के मनीष व नवाबगंज के सुनील सिंह भी थे। कुछ दिन बाद एजेंट ने सभी को म्यांमार भेज दिया। वहां चीन की एक कंपनी ने जबरन साइबर क्राइम करवाना शुरू कर दिया। भारत सरकार की दखल पर म्यांमार से सभी को वापस लाया गया।
सभी को वापस कर दिया
म्यांमार से वापस लौटे नवाबगंज के जलालपुर गांव निवासी सुनील कुमार के भाई अनिल ने बताया कि सुनील होटल मैनेजमेंट का कोर्स किए हैं। उनके एक मित्र पहले से म्यांमार में हैं। उनसे फोन व वाट्सएप के माध्यम से बात होती थी। उन्होंने नौकरी के बाबत जानकारी दी थी। वहां जिस कंपनी में काम करते थे, उसकी बगल वाली कंपनी पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उनके भाई की भी कंपनी को बंद करके वापस कर दिया गया है।
हम कुछ नहीं बता सकते
-टिकरी क्षेत्र के देवीनगर निवासी स्नातक पास सोनू 16 सितंबर को म्यांमार गया था। वहां से थाईलैंड भेज दिया गया। परिजनों से भी संपर्क नहीं करने दिया गया। पिता कोकिल प्रसाद के अनुसार उसे वहां बंधक बना लिया गया था। मंगलवार की सुबह बात हुई थी, जिस पर सोनू ने घर आने की बात कही थी। अभी तक आया नहीं है। इससे ज्यादा हम कुछ नहीं बता सकते हैं। पड़ाेसी डॉ. शोभित श्रीवास्तव भी अभी सोनू के घर न आने की बात कही।