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आखिर जिंदगी की जंग हार गये डॉ. रणंजय

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गोंडा में डॉ. रणंजय तिवारी फाइल फोटो। - फोटो : GONDA
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गोंडा। हमेशा लोगों की सेवा करते रहे और लोगों का इलाज किया हजारों लोगों उनके इलाज से स्वस्थ भी हो गये लेकिन खुद जिंदगी की जंग हार गये। हम बात कर रहे हैं इटियाथोक में तैनात युवा चिकित्सक डॉ. रणंजय तिवारी की। कोरोना के संक्रमण काल में कैंसर से जंग लड़ते-लड़ते गोंडा जिले का यह युवा चिकित्सक जिंदगी की जंग हार गया। अचानक उनकी मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। बता दें कि सीएचसी इटियाथोक पर तैनात डॉ. रणंजय तिवारी की बुधवार देर शाम मौत हो गई। वह राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत इंटियाथोक ब्लॉक में तैनात थे।
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बताया जा रहा है कि पिछले एक वर्ष से गले के कैंसर से पीड़ित थे। इसके बाद भी उन्होंने जिम्मेदारी का निर्वाह किया। उनका मुंबई के टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट में इलाज चल रहा था। ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हो गये थे लेकिन कैंसर ने दोबारा असर कर दिया और पूरे शरीर में फैल जाने से बुधवार को उनकी मौत हो गई। एक माह से अत्यधिक अस्वस्थता के कारण ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे। सीएचसी अधीक्षिका डॉ. श्वेता तिवारी ने बताया कि डॉ. रणंजय तिवारी बहुत अच्छे चिकित्सक थे। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में मार्च, अप्रैल और मई तक जिम्मेदारी का निर्वाह करते रहे। उनके आकस्मिक निधन से पूरे सीएचसी पर शोक की लहर दौड़ गई है। उनके साथ में कार्यरत स्टाफ ने उनके गोंडा आवास पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। दो छोटे छोटे बच्चे और पत्नी का रो-रो कर स्थिति बहुत खराब हो गई है। इनके पिता जगदीश प्रसाद तिवारी श्रावस्ती में भूमि संरक्षण अधिकारी के पद से तीन वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए थे।
तीन साल पूर्व बड़े भाई की हुई थी हत्या
परिवार पर लगातार बीते कुछ वर्षों से दुखों का साया मंडरा रहा है। लगभग तीन वर्ष पूर्व ही इनके बड़े भाई बृजनंदन तिवारी उर्फ मंटू तिवारी की हत्या कर दी गई थी। उस समय इस हत्याकांड के बाद गोंडा और बहराइच दो जिलों की पुलिस काफी दिनों तक हलकान रही थी। वहीं अब डॉ. रणंजय की मौत से पूरा परिवार असहाय हो गया है। बताया जा रहा है कि डॉ. रणंजय तिवारी काफी व्यवहार कुशल और संवेदनशील व्यक्ति थे।
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