जिले के एक दर्जन से अधिक विभागों के मजदूर व कर्मचारी संगठनों के एक दिवसीय शुक्रवार को हड़ताल पर चले जाने से प्रशासनिक व्यवस्था पंगु हो गई। विभाग में जहां कर्मियों के हड़ताल पर रहने से कोई काम नहीं हुआ, वहीं जन सेवाएं देने वाले विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से लोगों को काफी परेशानी हुई। बैंक व डाक कर्मचारियों की हड़ताल से करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर कर्मचारियों की हड़ताल में बैंक व डाक विभाग की हड़ताल से 20 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। इलाहाबाद बैंक स्टाफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एमडी सिंह की अगुवाई में बैंक के कई संगठनों के बैनर तले बैंक कर्मचारियों ने अपनी मांगों ने लेकर धरना-प्रदर्शन किया।
इसी तरह से अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ के मंडल सचिव राजाराम मिश्र की अगुवाई में डाक कर्मियों ने काम बंद कर प्रदर्शन किया। बैंक व डाक विभाग में कोई लेनदेन नहीं हो सका। संयुक्त परिषद जिलाध्यक्ष इंद्रपाल तिवारी की अध्यक्षता में सिंचाई विभाग, विकास विभाग के कर्मचारियों ने सफाई कर्मचारी संगठन व उनके घटक विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की।
स्कीम वर्कर्स यूनियन के संयोजक दिलीप शुक्ला व मंत्री मीनाक्षी खरे की अगुवाई में आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसी तरह से यूपी एग्रीकल्चर मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन गोंडा इकाई के जिलाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह की अगुवाई में कृषि विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार को काम बंद हड़ताल रखी। विभाग के सर्य किशोर शर्मा, सुधीर सिंह, अनिल सिंह, विष्णू प्रसाद, बृजेश, रामेश्वर दत्त सिंह, दिनेश पाण्डेय आदि कर्मचारियों ने कार्यालय के बाहर धरना दिया।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की नीतियां कर्मचारी विरोधी हैं। बीमा कर्मचारी संघ के सचिव राम नरेश शुक्ला, ट्रेड यूनियन के संयोजक राजेश दीक्षित, मंत्री नीलम पांडेय, राज्य कर्मचारी महासंघ के मंडलीय मंत्री सत्य प्रकाश शुक्ला की अगुवाई में विभागीय कर्मचारियों ने धरना दिया। स्वायत्त शासन कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष मनीष कुमार की अगुवाई में कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में शुक्रवार को काम नहीं किया।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की ओर से हड़ताल में कई महत्वपूर्ण विभागों के शामिल होने से जनमानस पर बुरा असर पड़ा है। रोडवेज कर्मियों के हड़ताल में शामिल होने से लोगों को काफी दिक्कत हई। डाक व बैंकों के हड़ताल से कोई लेनदेन नहीं हो सका। लोगों को कारोबार व दूसरे कार्य के लिए पैसों के लेनदेन में समस्या हुई। अस्पताल कर्मियों के हड़ताल पर होने से लोगों को लोगों को जरूरी दवाएं व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का र्कोइ लाभ नहीं मिल सका।
रोडवेज, डाक, बैंक व स्वास्थ्य विभाग जैसे कई अहम विभागों के कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से आम लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। यहां से दूरदराज से आए लोगों को काम न होने पर मायूस लौटना पड़ा। मोहल्ला इमामबाड़ा निवासी रहमान ने बताया कि बैंक में पैसा निकालने गए थे।
बैंक पहुंचे तो पता चला कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसी तरह से सिविल लाइन निवासी संतोष कुमार का कहना था कि उन्हें एक जरूरी पत्र रजिस्ट्री करनी था, लेकिन कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से नहीं हो सकी। डाक घर पर रोज की तरह तमाम लोग अपने काम के लिए पहुंचे, लेकिन लोगों को निराश लौटना पड़ा। कृषि विभाग में भी कई किसानों को जानकारी न मिल पाने से वापस लौटना पड़ा। किसान कुबेरे, सम्पत, रामपाल व अक्षयबर ने बताया कि विभाग में कोई कर्मचारी कुर्सी पर बैठा ही नहीं मिला, जिससे मायूस होकर लौटना पड़ा।
कर्मचारी व मजदूर संगठनों की ये हैं मांगें
* कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने।
* सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों की विसंगतियों को दूर करने।
* न्यूनतम मासिक मजदूरी 18 हजार रुपये करने।
* कर्मचारियों का तबादला गैर जनपद न करने।
* रेल रक्षा में विदेशी निवेश में रोक लगाने।
* स्थायी व बारामासी कार्य के लिए ठेका प्रथा बंद होने।
* महंगाई पर नियंत्रण की ठोस व्यवस्था बनाने।
* बोनस एवं प्रोविडेंट फंड का 45 दिनों में भुगतान करने आदि।
इन विभागों के कर्मचारी रहे हड़ताल पर
* बैंक * डाक * कृषि * स्वास्थ्य * विकास * राजस्व * बाल विकास पुष्टाहार * परिवहन ।