गोंडा। नाबालिग से छेड़छाड़, दुष्कर्म का प्रयास व पॉक्सो एक्ट के झूठे मामले में दो युवकों को फंसाने की दोषी शीला को अब जेल की हवा खानी पड़ेगी। पॉक्सो कोर्ट ने उसे तीन दिन के कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
परसपुर के एक गांव की रहने वाली शीला ने थाने में दर्ज कराए केस में कहा कि 29 जुलाई 2017 की शाम उसकी 12 साल की बेटी घर के सामने गन्ने के खेत में घास काट रही थी। तभी रवींद्र कुमार, शत्रोहन व अर्जुन ने उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। विवेचना में साक्ष्य न मिलने पर पुलिस ने न्यायालय में अंतिम आख्या प्रस्तुत कर दी। वादिनी के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने अंतिम जांच आख्या निरस्त कर मुकदमा परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान परिवादिनी व अन्य के बयान के आधार पर न्यायालय ने रवींद्र कुमार व अर्जुन को विचारण के लिए तलब किया। लेकिन ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर सका। इस पर 27 सितंबर 2024 को विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट राजेश नारायण मणि त्रिपाठी ने रवींद्र कुमार व अर्जुन को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के समक्ष झूठी गवाही देने के संबंध में परिवादिनी शीला के खिलाफ प्रकीर्ण दांडिक वाद दर्ज किया गया था। शनिवार को विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट राजेश नारायण मणि त्रिपाठी ने शीला को दंडित किया। (संवाद)