गोंडा। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के काफी पद खाली पड़े हैं, जिन पर तैनाती की कवायद चल रही है। लेकिन जो डॉक्टर तैनात भी हैं वे तैनाती स्थल पर न बैठकर प्राइवेट क्लीनिक चला रहे हैं। ऐसा ही एक मामला है बहराइच के पयागपुर में बनघुसरा गांव का। यहां आयुर्वेदिक चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर अस्पताल में न बैठकर गोंडा में क्लीनिक चला रहे हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है और उन्हें परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
बहराइच के पयागपुर में बनघुसरा गांव है। यहीं स्वास्थ्य विभाग का बनघुसरा आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी स्थापित है। इसमें डॉ. अशोक कुमार गौतम की तैनाती बतौर चिकित्साधिकारी के पद पर है, लेकिन ये काफी समय से गोंडा में क्लीनिक चला रहे हैं। गोंडा शहर में महराजगंज कर्बला रोड पर डॉ. अशोक कुमार गौतम ने बाकायदा अपना क्लीनिक खोल रखा है। क्लीनिक के सामने लगे बोर्ड पर डीजी क्लीनिक और डॉक्टर की डिग्री के तौर पर मेडिकल ऑफीसर, फिजीशियन एंड सर्जन अंकित है।
नहीं मिलता एनपी-एलोपैथिक की तरह आयुर्वेदिक विभाग में तैनात डॉक्टरों को अलग से किसी तरह का एनपीए (नान प्रैक्टिस एलाउंस) नहीं मिलता है।
यह है नियम-किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर स्थायी रूप से तैनात कोई भी डॉक्टर क्लीनिक नहीं चला सकता। ड्यूटी के दौरान उसे सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक अस्पताल में बैठना होगा। ताकि मरीजों को वापस न लौटना पड़े।
सीएमओ रिलीज करते वेतन-किसी भी जिले में तैनात डॉक्टरों सहित अन्य स्टाफ का वेतन, चाहे वह एलोपैथिक में तैनात हो या फिर आयुर्वेदिक, यूनानी व अन्य किसी विंग में। सबका वेतन उस जिले के सीएमओ (मुख्य चिकित्साधिकारी) द्वारा ही रिलीज किया जाता है।
मामले को दिखवाएंगे-डॉ. अशोक कुमार गौतम बतौर चिकित्साधिकारी बनघुसरा आयुर्वेदिक चिकित्सालय में तैनात हैं। अगर वह बनघुसरा में न बैठकर अपना क्लीनिक चला रहे हैं तो इसे दिखवाया जाएगा। आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सरकार से किसी तरह का कोई एनपीए (नान प्रैक्टिस एलाउंस) नहीं मिलता है। ड्यूटी पीरिएड में किसी तरह की प्राइवेट प्रैक्टिस करना गलत है। -डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी, बहराइच
नहीं कर सकते प्राइवेट प्रैक्टिस-स्वास्थ्य विभाग में चाहे परमानेंट पोस्टिंग वाला कोई डॉक्टर हो या फिर संविदा पर ड्यूटी करने वाला। सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक ड्यूटी पीरिएड में किसी प्रकार की कोई प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। यह व्यवस्था एक समान रूप से हर विंग के डॉक्टर पर लागू होती है। अगर कोई डॉक्टर ऐसा कर रहा है, तो यह गलत है, इसे दिखवाया जाएगा।-डॉ. जेएन मिश्र, मुख्य चिकित्साधिकारी, बहराइच
मेरा नहीं परमानेंट क्लीनिक
हमें एनपीए नहीं मिलता है, इसलिए कभी-कभार जब हफ्ते-दो हफ्ते में अस्पताल से खाली होते है तो गोंडा में मरीजों को देख लेते हैं। मेरा कोई परमानेंट क्लीनिक नहीं है।-डॉ. अशोक कुमार गौतम, चिकित्साधिकारी, बनघुसरा आयुर्वेदिक चिकित्सालय पयागपुर बहराइच