श्री अयोध्या धाम की चौरासी कोसी परिक्रमा यात्रा थाना टिकैतनगर बाराबंकी से चल कर गुरुवार को परसपुर थाना क्षेत्र के तुलसीधाम बहुवन मदार मांझा स्थित घाघरा नदी को नाव से पार कर जनपद गोंडा में प्रवेश कर गई। परिक्रमा में शामिल सैकड़ों साधु संतों ने दुलारे बाग में डेरा डाल दिया है, जहां रात्रि निवास करेंगे। परिक्रमा की सुरक्षा के लिए एक प्लाटून पीएसी साथ में चल रही है। बहुवन मदार माझा में विहिप व बजरंगदल के पदाधिकारियों ने संतों व श्रद्धालुओं का माला पहना कर स्वागत किया।
परिक्रमा संचालक महंत गयादास ने बताया कि 23 अप्रैल को मखौड़ा जिला बस्ती से चल कर कई जनपदों से होते हुए सैकड़ों साधु संतों के काफिले ने गुरुवार को सुबह बेलखरा भगत बगिया टिकैत नगर जनपद बाराबंकी से चल कर थाना क्षेत्र परसपुर के बहुअन मदार माझा स्थित नाव द्वारा मूर्तिहन घाट पर घाघरा नदी पार कर जनपद गोंडा के विजयगंज के दुलारे बाग में डेरा डाल दिया। जहां श्रद्धालुओं ने साधु संतों एवं महिलाओं का मालाओं से स्वागत कर उनके जलपान का व्यवस्था की।
परिक्रमार्थी यहीं पर रात्रि निवास भी करेंगे तथा शुक्रवार को पुन: यह परिक्रमा यहां से चल कर ब्रह्मचारी चौराहा चरसड़ी में जलपान के बाद जंबू दीप में दोपहर भोजन के बाद तुलसी जन्मभूमि राजापुर सूकर खेत में रात्रि विश्राम के बाद शनिवार को गुरु नरहरि आश्रम सूकरखेत में दोपहर विश्राम के बाद वृंदावन खेरा पुरविहंन पुरवा में रात्रि विश्राम करेगी।
आठ मई को यह परिक्रमा तिवारी गंज बाजार में जलपान के बाद बखरिहा पूर्वीबाग उमरी बेगमगंज के लिए प्रस्थान करेगी। सेमरा गंगाराम भगत के यहां रात्रि विश्राम के बाद अपने अगले पड़ाव की तरफ चल देगी। 15 मई को भंडारा के बाद 16 को सीताकुंड अयोध्या में परिक्रमा की समाप्ति तथा विदाई होगी। साधु संत दुलारे बाग में भजन कीर्तन करने में व्यस्त है। वहीं स्थानीय ग्रामीण साधु संतों की सेवा में लगातार तल्लीन है।
इस यात्रा में विश्व हिंदू परिषद हनुमान मंडल अवध धाम के पदाधिकारी व तमाम साधु संत शामिल हैं। परिक्रमा प्रमुख सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बैशाख कृष्ण प्रतिपदा तदनुसार 23 अप्रैल को प्रात: मखभूमि मखौड़ा से आरंभ होकर बैशाख शुक्ल सप्तमी तदनुसार 13 मई को मखौड़ा में ही पूर्ण होगी।
यात्रा प्रमुख ने बताया कि पौराणिक महत्व की इस 84 कोसी परिक्रमा यात्रा में सरकार के द्वारा साधु संतों तथा श्रद्धालुओं के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। महंत गयादास ने घाघरा नदी के मूर्तिहन घाट पर पुल बनवाने की मांग करते 84 कोसी परिक्रमा के रास्तों का विकास कराने की मांग की है।