गांवों के मजदूरों को गांव में ही सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जिले में बेपटरी हो गई है। इस योजना के तहत काम करने वाले 72 हजार परिवारों की 5.59 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया है। तीन माह बीतने के बावजूद इन श्रमिकों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है। मजदूरी न मिलने से इन मजदूरों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है और गांव के इन श्रमिकों को शहरों की तरफ पलायन को मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की तरफ हो रहे मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अप्रैल से जुलाई तक जिले के 72 हजार परिवारों ने इस आस के साथ मजदूरी की थी कि इस मजदूरी के पैसे से उनके घरों का चूल्हा जल सकेगा और उनके बच्चे भी स्कूलों में पढ़ाई कर सकेंगे। लेकिन सरकार की बेरुखी ने इन मजदूरों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
चार माह तक इस योजना के तहत काम करने के बाद भी इन मजदूरों को फूटी कौड़ी भी नहीं मिल सकी है। मनरेगा में काम करने वाले जिले के 72 हजार परिवारों की करीब 5.59 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया है, लेकिन सरकारी मशीनरी को इनकी मजदूरी देने की फ्रिक नहीं है। मजदूरी न मिलने से इन श्रमिकों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है और बच्चों की स्कूलों की फीस भी नहीं जमा हो पा रही है।
मुजेहना के मनरेगा मजदूर रामसजीवन की पत्नी बीमारी से जूझ रही है, लेकिन पैसे के अभाव में उसका इलाज नहीं हो पा रहा है। रामसजीवन का कहना है कि उसने मनरेगा के तहत 40 दिन काम किया था, लेकिन अभी तक मजदूरी नहीं मिली।
इसी तरह की समस्या मनरेगा मजदूर रामकेवल, सैफुद्दीन, नूरजहां, राजकुमार व निहोरे की भी है। मजदूरी न मिलने से अपने परिवार के भरण पोषण के लिए मजदूरों को गांव छोड़कर शहरों की तरफ पलायन करना पड़ रहा है।
इसके अलावा पक्का काम करने वाले मिस्त्री भी अपनी 1.92 करोड़ रुपये की मजदूरी भी नहीं पा सके हैं। उधर, मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी के अलावा इस योजना के तहत 1110 फर्मों ने मैटीरियल सप्लाई किया है। लेकिन इन फर्मों को भी अब तक भुगतान नहीं हो सका है। मैटीरियल देने वाली इन फर्मों का भी 481.55 करोड़ रुपये बकाया है।
मनरेगा में भुगतान को लेकर ऑडिट रिपोर्ट का भी पेंच फंसा हुआ है। अधिकारियों की मानें तो मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की एक बार ऑडिट रिपोर्ट भेजी जा चुकी है, लेकिन इस ऑडिट रिपोर्ट को भारत सरकार ने खारिज कर दिया है। अब मनरेगा की अपर आयुक्त पिंकी जोवेल ने अधिकारियोें को फिर से 20 अक्तूबर तक ऑडिट रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।